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सीपीयू ने कार चालक को लात-घूसों से पीटा

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देहरादून। उत्तराखण्ड के चंद जनपदों में सीपीयू के चंद जवान आवाम के साथ बार-बार गुण्डागर्दी करते हुए नजर आ रहे हैं जिससे पुलिस का मित्रता, सेवा, सुरक्षा के दावों की धज्जियां उड रही हैं।

 

गजब बात तो यह है कि चार बडे जनपदों में तो पुलिस मुख्यालय ने सीपीयू तैनात की हुई है लेकिन पिथौरागढ़ जैसे जनपद में भी पुलिस कप्तान ने सीपीयू का गठन करने के लिए अपने कदम क्यों आगे बढाये यह काफी हैरान करने वाली बात है। बहस छिडी हुई है कि पुलिस मुख्यालय बडा है या फिर पिथौरागढ़ जनपद का पुलिस महकमा?

 

पुलिस मुख्यालय से जब पिथौरागढ़ में सीपीयू को तैनात करने का कोई आदेश ही नहीं है तो फिर वहां पुलिस को काली वर्दी पहनाकर क्यों तैनात कर दिया गया। सीपीयू का एक जवान पिथौरागढ़ जैसे जनपद में सडक पर खुलेआम कार चालक के साथ गुण्डों की तरह गुण्डागर्दी करता हुआ दिखाई दिया और उसे लात-घूसों से वह फिल्मी अंदाज में इस कदर मार रहा था मानो पुलिस अफसरों ने इन सीपीयू कर्मियों को खुली छूट दे दी हो कि जो भी नियमों का उल्लंधन करेगा उसे बीच सडक में ही लात-घूसों से पिटें?

 

पुलिस कप्तान को जब ‘क्राईम-स्टोरी’ ने गुण्डागर्दी की यह वीडियो दिखाई तो कप्तान ने तत्काल गुण्डागर्दी करने वाले सीपीयू कर्मी को निलम्बित कर दिया। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिरकार पुलिसकर्मियों को किसने यह हक दे दिया कि वह वाहन चालकों के साथ मारपीट कर उन्हें सडक पर अपमानित करें? गजब बात तो यह भी है कि प्रदेश की पुलिस मुखिया ऐसी घटनाओं पर क्यों खामोशी साधे हुए हैं यह एक बडा सवाल अब राज्य में खडा हो गया है।

 

उल्लेखनीय है कि पुलिस मुख्यालय ने देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल व उधमसिंहनगर में सीपीयू का गठन कर रखा है। देखने में आ रहा है कि चंद जनपदों में अकसर कुछ सीपीयू कर्मी वाहन चालकों के साथ अभद्रता और मारपीट करने के लिए आगे आ जाते हैं जिससे सीपीयू के खिलाफ आवाम के मन में एक बडी नाराजगी देखने को मिलती रही है।

 

सीपीयू कर्मियों के पूर्व में हुए किस्से अभी शांत भी नहीं हुए थे कि कुमांऊ के पिथौरागढ़ जैसे शांत जनपद में भी सीपीयू कर्मी की सडक पर खुलेआम गुण्डागर्दी देखने को मिली। हुआ यूं कि एक कार चालक ने यातायात नियमों का उल्लंघन किया तो सीपीयू कर्मियों ने पीछा कर कार को घेर लिया और उसके बाद एक सीपीयू कर्मी ने उस कार चालक को बाहर निकाला और उस पर लात-घूसे गुण्डों की तरह मारने शुरू कर दिये।

 

खुलेआम सडक पर सीपीयू की इस गुण्डागर्दी को देखकर बाजार के व्यापारी व लोग भी हैरत में पड गये कि आखिरकार पुलिस को किसने अधिकार दे दिया कि वह खुद सडकों पर अपने आपको जज समझकर किसी को भी सजा सुनाने के लिए आगे आ जायें। इस सीपीयू की गुण्डागर्दी की गूंज पुलिस कप्तान अजय जोशी के पास पहुंची तो उन्होंने सीपीयू कर्मी को लाइन हाजिर कर दिया लेकिन आज जब ‘क्राईम-स्टोरी’ ने पुलिस कप्तान को यह वीडियो दिखाया तो वह भी हैरान रह गये कि किस तरह से पुलिसकर्मी वाहन चालक को सरेआम सडक पर पीट रहा है।

 

कप्तान ने तत्काल गुण्डागर्दी करने वाले सीपीयू कर्मी सोनू कार्की को तत्काल प्रभाव से निलम्बित कर दिया। सवाल यह है कि आखिरकार पिथौरागढ़ जैसे जनपद में जहां यातायात का कोई दबाव ही नहीं है तो वहां सीपीयू को तैनात करने का औचित्य क्या है? बहस इस बात को लेकर भी छिडी हुई है कि अगर यातायात पुलिसकर्मी यातायात सुधारने के लायक ही नहीं है तो फिर यातायात महकमें को ही खत्म कर सीपीयू फोर्स को शासन से हरी झण्डी दिला देनी चाहिए जिससे कि हर जिले में सीपीयू के जवान ही यातायात सुधारने के लिए काली वर्दी में तैनात दिखें।