शर्मनाक: इंसानियत भी मुर्दा हो गयी उत्तराखंड में!

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चमोली: शर्मनाक: इंसानियत भी मुर्दा हो गयी उत्तराखंड में! चमोली और रुद्रप्रयाग के बीच से एक इन्सानियत को शर्मशार  करने वाली घटना सामने आई है ,और साथ ही इस घटना ने पहाड़ो पर सरकारी चिकित्सा व्यवस्थाओ की पोल खोल कर रख दी है ।


चमोली में विकासखंड घाट स्थित घुनी गांव के मोहन सिंह अपनी गर्भवती पत्नी नंदी देवी को डिलीवरी के लिए ज़िला अस्पताल गोपेश्वर ले गए थे,कल सांय को अस्पताल में चिकित्सको ने गर्भवती नंदी देवी का चेकअप करने के बाद संसाधनों की कमी का हवाला देकर महिला को हायर सेंटर रेफर कर दिया ,

 

जब गर्भवती महिला के पति ने हायर सेंटर श्रीनगर जाने के लिए अस्पताल प्रबंधन से एम्बुलेन्स की माँग की तो अस्पताल प्रशासन ने एम्बुलेन्स देने से मना कर दिया ,जिसके बाद पूरी रात मोहन सिंह ने प्रसव पीड़ा के दर्द से परेशान अपनी पत्नी नंदी देवी के साथ अस्पताल में ही काटी,एम्बुलेन्स न मिलने पर मोहन सिंह आज सुबह गोपेश्वर से 6 बजे प्राइवेट बस में अपनी गर्भवती पत्नी को साथ लेकर श्रीनगर बेस अस्पताल जाने के लिए स्वार हुआ।

 

जैसे ही बस रुद्रप्रयाग के पास पहुंची तो गर्भवती महिला ने पेट मे तेज दर्द की शिकायत की और टॉयलेट जाने की इच्छा जताई जिसके बाद ड्राइवर ने बद्रीनाथ हाईवे पर तिलणी गांव के पास सुनसान जगह पर बस रोकी ,गर्भवती महिला का पति मोहन सिंह अपनी पत्नी को टॉयलेट करवाने को लेकर जैसे बस से बाहर निकला तो बस के ड्राइवर ने बस स्टार्ट की और समय कम होने का हवाला देकर जाने लगा,

 

मोहन सिंह ने बस ड्राइवर से रुद्रप्रयाग तक ले जाने की गुहार भी लगाई लेकिन बस वाले ने एक न सुनी, और किराया वापस किये बगैर ही मोहन सिंह और उसकी गर्भवती पत्नी को सड़क पर ही छोड़कर रुद्रप्रयाग के लिए निकल पड़ा,सड़क पर नंदी देवी की प्रसव पीड़ा से जान निकली जा रही थी ,पत्नी की परेशानी को देखकर मोहन सिंह ने 108 एम्बुलेन्स को कॉल कर जानकारी दी ,लेकिन एम्बुलेन्स के पहुंचने तक सड़क पर ही गर्भवती महिला ने एक बच्ची को जन्म दे दिया था ,

 

लेकिन बगैर रखरखाव के नवजात शिशु की सड़क पर ही मौत हो गई, हालांकि 108 एम्बुलेन्स के जरिये गर्भवती महिला नंदी देवी को रुद्रप्रयाग ज़िला अस्पताल में भर्ती करवाया गया है ,और महिला का उपचार चल रहा है ।लेकिन इस घटना ने आज के पढे लिखे समाज पर भी एक कलंक का धब्बा छोड़ दिया है,

 

क्योकि बस में कई पढे लिखे सवार लोगो के सवार होने के वाबजूद भी किसी ने गर्भवती महिला की स्थिति देखकर बस रुकवाने को नही कहा,अगर बस ड्राइवर महज 3 किलोमीटर आगे रुद्रप्रयाग तक गर्भवती महिला और उसके पति को बैठा देता क्या पता नवजात शिशु की जान नही जाती।


जबकि मोहन सिंह ने अपना और अपनी पत्नी का श्रीनगर तक का टिकट भी लिया था। लगता नही है उस बस में इंसान रहे होंगे, अगर ये चुनाव का वक्त होता तो वही बस भाजपा और कोंग्रेस के बैनर टांगे घंटो खड़ी रहती। हर दूसरे दिन उत्तराखंड की महिलाओं के साथ ये घटना घट रही है,

 

लेकिन मोदी और राहुल के अंधभक्तों को इस देश मे सिवाय रामराज्य के कुछ दिखता ही नही है। याद रखना ऊपर वाले के यंहा देर है लेकिन इंसानों से जानवर बनते लोगों पर भी एक दिन उसकी लाठी चलेगी। तब न मोदी बचा पाएगा ना राहुल। इन दोनों पार्टियों के अंधभक्तों ने इस राज्य को बर्बाद कर दिया है।