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शर्मनाकः अब तो आत्मा भी मर गई इंसान की !

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कुलदीप राणा
रूद्रप्रयाग: रूद्रप्रयाग में एक व्यक्ति बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे इलाहाबाद बैंक के नीचे अचेत अवस्था में पडे हुये थे.. इस बीच सैकड़ों लोग यहां से गुजरे लेकिन किसी ने भी इस व्यक्ति का हाल जानने और समझने की कोशिश नहीं की..आते तमाशा देखते और जाते!

साढे पांच बजे जब में और मेरा साथी प्रदीप सेमवाल यहां से गुजर रहे थे तो यहां पर आठ-दस लोगों की भीड़ जुटी हुई थी.. उत्सुकतावस हम भी यहां पर रूके तो देखा एक बुजुर्ग व्यक्ति अचेत पडे हुये थे..नाक पर अंगुली लगाकर देखा तो पता चला यह व्यक्ति इस दुनियां को सदा के लिये छोड़कर चला गया है!

भीड़ से पूछताछ करने पर पता चला कि यह व्यक्ति इसी मार्ग पर चक्कर आने के कारण गिर गया था लेकिन किसी ने इनको उठाने की जनमत तक नहीं उठाई ! बाद में दो नेपालियों ने उन्हें सड़क से उठाकर किनारे पर रखा….शायद उस वक्त कोई एम्बुलेंस अथवा पुलिस को खबर करते तो उन्हें प्राथमिक उपचार मिलता और वो बच भी सकते थे लेकिन आज इनसानियत के साथ लोगों की आत्मा भी मर चुकी है!

न जाने कैसे पहाडियों का दिल पत्थर हो गया!! पता चला की ये मुख्यालय के नजदीकी गांव रौठिया के मेहरबान सिंह हैं!! हमने पुलिस को बुलाया और करीब 15 मिनट की अवधि में पुलिस भी पहुंची गई!! इनसानियत को शर्मनाक करने वाला वाक्या तो उस वक्त सामने आया जब ऱौठिया गांव और उस गाव के आसपास के कई लोग तमाशा देख रहे थे और वे इन बुजुर्ग व्यक्ति के परिचित भी थे!! मगर कोई इनकी मदद के लिए आगे नहीं आ रहे थे!

जब पुलिस ने शव के साथ अस्पताल आने को कहा तो किसी ने कहा मैं गांव का हूं परिवार का नहीं!! किसी ने कहा मैं पडोस का हूं.. लेकिन कोई शव के साथ अस्पताल जाने को तैयार नहीं हुआ!! बाद में पुलिस खुद ही उन्हें पचायतनामा भरकर अस्पताल ले गई!!! इस वाक्य ने आज बहुत झकझोर की इनसान कितना खुदगर्ज हो गया है!! ना उसमें संवेदना बची है ना आत्मा!! ना दया है ना करूणा!

इस बुजुर्ग के घायल होने पर किसी का भी दिल नहीं पसीजा!!इंसान कैसे पत्थर हो गये हैं समझ नहीं पा रहा हूँ!! ये तो पहाडियों का मुल्क है….पहाड़ी तो दिलदार होते थे मदद के लिये हमेशा आगे रहते थे पर आज क्यों इनकी आत्मा और संवेदना दोनों खत्म हो गई!! भरे बाजार में इन्सानों का हुजुम आ रहा जा रहा लेकिन मानवता को कलंकित करने वाला यह वाक्या झकझोर करने वाला था!

कुलदीप राण आजाद की फेसबुक वाल से साभार