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शर्मनाकः देवभूमि में हर 30 घंटे में एक महिला से दुराचार !

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देहरादून: शर्मनाकः देवभूमि में हर 30 घंटे में एक महिला से दुराचार ! देवभूमि कौन कहेगा उत्तराखंड को जब यहां ऐसा होगाद्ध यह हकीकत है देवभूमि की और आप इसे नकार नहीं सकते। पिफलवक्त जो आंकडे बता रहे है इसके हिसाब से यह आंकडा है। लेकिन अगर गहनता से जांच की जाए तो यह आंकडा और चौकाने वाला हो सकता है।

आपको बता दें कि देवभूमि माने जाने वाले उत्तराखंड में आपराधिक घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। बदमाशों के हौसले बुलंद हैं। नैशनल क्राइम रेकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं के खिलाफ अपराध दोगुने हो गए हैं। रिपोर्ट बताती है कि उत्तराखंड में 300 से अधिक महिलाएं दुराचार का शिकार हुई हैं।

हर 30 घंटे में एक महिला से दुराचार का मामला सामने आ रहा है। महिलाओं के खिलाफ 70 फीसदी अपराध सिर्फ तीन जिलों, देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में ही हैं। राज्य महिला आयोग के आंकड़े भी इसकी तस्दीक करते हैं।

राज्य महिला आयोग में हर साल महिला अपराध से जुड़े एक हजार से अधिक मामले दर्ज हो रहे हैं। 2015-16 में इन जिलों में कुल अपराध का 74.6 फीसदी, 2016-17 में 75.4 फीसदी और 2017-18 में 68.5 फीसदी मामले दर्ज हुए हैं। 2017 में जनवरी से दिसंबर तक 2391 केस पुलिस रेकॉर्ड में दर्ज हैं।

हैरान करने वाली बात ये है कि राजधानी में सबसे अधिक महिला अपराध के मामले दर्ज किए जा रहे हैं। महिलाओं और बच्चियों से रेप और हत्या के मामले बढ़ने से जनसंगठन सरकार के खिलाफ खड़े होने लगे हैं। हाल में उत्तरकाशी में एक बच्ची को अगवा कर रेप के बाद हत्या कर दी गई।

साथ ही NIVH संस्थान की बच्चियों के यौन उत्पीड़न के मामले पर कोहराम मच गया। बच्चियों से अपराध के मामलों को देख मुख्यमंत्री को यह घोषणा करनी पड़ी कि नाबालिगों से रेप करनेवालों को फांसी की सजा का प्रावधान किया जाएगा। यही नहीं, बीजेपी के दो और कांग्रेस के एक विधायक पर भी महिला अपराध के केस दर्ज हैं।

देहरादून में अप्रैल 2017 में रायपुर में बहू ने प्रेमी के साथ मिलकर पति और ससुर का कत्ल कर दिया। 27 अप्रैल को डकैतों ने गारमेंट व्यवसायी के घर डाका डाला। 13 जून को हर्रावाला में CISF के अधिकारी के घर लूटपाट हुई। 2017 में देहरादून में 500 से ज्यादा साइबर क्राइम के मामले दर्ज हुए।

11 सितंबर 2017 को सामने आए किडनी कांड ने पूरे देश को हिला दिया। रुड़की के रामनगर का कोर्ट परिसर 20 नवंबर 2017 को गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठा। कुख्यात देवपाल राणा को कोर्ट के बाहर गोलियों से भून डाला गया था। वारदात की प्लानिंग देहरादून के रेसकोर्स में हुई थी।

चंपावत के सिलाड़ ग्राम पंचायत के उदाली गांव के चाचड़ी तोक में तीन दिन पूर्व तिहरे हत्याकांड ने हड़कंप मचा दिया। आरोपी प्रीतम सिंह को दबोच लिया गया। वह सीरियल किलर निकला। उसने पांच हत्याओं को अंजाम देने की बात कबूली।पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) अशोक कुमार का कहना है कि इस तरह की घटनाओं को आम कहना ठीक नहीं। उनका दावा है कि राज्य बनने के बाद गंभीर अपराधों में कमी आई है।

मानवाधिकार आयोग को लगता है कि कहीं न कहीं आंकड़ों की बाजीगरी की जा रही है। राज्य मानवाधिकार आयोग ने पिछले साल मामलों का संज्ञान लेते हुए पुलिस से रिपोर्ट मांगी थी। पिछले साल देहरादून में अप्रैल में पति और ससुर के डबल मर्डर से लेकर नवंबर में रुड़की के कोर्ट परिसर में हुए गैंगवार तक की फेहरिस्त काफी लंबी है। राजधानी होने की वजह से देहरादून सनसनीखेज वारदातों के मामले में सबसे ज्यादा चर्चा में रहता है।