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श्रावण मास में शिव मंदिरों में उमड़ा है श्रद्धालुओं का सैलाब

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रुद्रप्रयाग। भगवान शिव का आत्मिक मास श्रावण आते ही शिव भक्तों में खासा उत्साह बना हुआ है। श्रावण मास में केदारघाटी के शिवालयों में सैकड़ों की तादात में भक्त तथा तीर्थयात्री आकर पुण्य अर्जित कर रहे हैं।

 

बाबा केदारनाथ, गुप्तकाशी स्थित विश्वनाथ मंदिर, पंचगददीस्थल औंकारेश्वर, नारायणकोटी नारायण, शिव पार्वती विवाह स्थल त्रियुगीनारायण, गढ़तरा स्थित नलेश्वर, हयूण गांव कोटेश्वर महोदव मंदिर में शिव भक्त रूद्राभिषेक करने पहुंचे। शिवपुराण में भी भगवान शिव के रूप का वर्णन मिलता है।

 

मान्यता है कि वर्षभर में केवल श्रावण मास में भगवान शिव सुसुप्तावस्था से जागृत अवस्था में आकर अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। श्रावण मास में माह भर के चार सोमवार को शिवालयों मंे दुग्धाभिषेक, जलाभिषेक, तेलाभिषेक कर चार पहर की पूजा पूर्ण की जाती है। तुलसीदल, बिल्वपत्र, जनेउ, पंजीरी, फल, फूल पंचामृत, इलायची, लौंग, पान के पत्ते आदि से शिव लिंग की परंपरागत पूजा की जाती है। यजमानों की शंाति तथा सुख सम्पन्नता की कामना के लिये ब्राम्हण माह भर शिवालयों में रूद्राभिषेक करते हैं।

 

मान्यता यह भी है कि श्रावण मास में बरसात का आगमन हरियाली तथा सुख शांति का संदेश लेकर आता है। किसानों की फसल लहलहाने लगती है। संसार का पालनहार भगवान शिव का हिमालय तथा हरियाली से विशेष लगाव है। इसलिए भी शिव शंकर का श्रावण प्रिय मास है। विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ मंदिर में सोमवार को चार पहर की पूजा का विशेष महत्व है। भक्त रात्रि जागरण करके विभिन्न पूज्य सामग्री से शंकर की पूजा करते हैं। रुद्रप्रयाग के कोटेश्वर मंदिर में गुफा के भीतर सैकड़ों स्फटिक लिंग हैं, जिसके दर्शन से भक्तों की कामनाएं पूर्ण होती हैं।

 

शिव मंदिरों में भक्तों की खासी भीड़ उमड़ रही है। मौसम खराब होने और लिंक मार्ग बंद होने के बावजूद भी शिव भक्त सैकडों की संख्या में पहुंच रहे हैं, मगर सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम न होने से उन्हें खासा डर बना हुआ है। कोटेश्वर मंदिर में अलकनंदा नदी का पानी शिव मंदिर के भीतर तक आ रहा है। यहां पर सुरक्षा की दृष्टि से न ही रैलिंग का निर्माण किया गया है और न ही प्रशासन की ओर से किसी सुरक्षा कर्मी की तैनाती यहां पर की गयी है। ऐसे में श्रद्धालुओं को हर समय नदी में गिरने का डर बना रहता है।