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सियासत के रंग : शक्तिमान पर कांग्रेस खामोश !

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देहरादून। सियासत के नये-नये रंग जिस तरह से उत्तराखण्ड में देखने को मिल रहे हैं उससे सवाल खडे हो रहे हैं कि क्या राजनीति के लिए कोई बेजुबान को भी मोहरा बना सकता है?

 

शक्तिमान को जिस तरह से कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री ने मोहरा बनाते हुए उसके सहारे एक बार फिर सत्ता में काबिज होने के लिए अपने कदम आगे बढाये थे तो ऐसा क्या डर सता गया था कि जब शक्तिमान की प्रतिमायें चौराहों पर रखने के लिए आई तो उन्हें रातो-रात हटाकर गायब कर दिया गया था।

 

उत्तराखण्ड से लेकर विदेशों तक में शक्तिमान को लेकर सोशल मीडिया पर जिस तरह से कांग्रेस ने पर्दे के पीछे रहकर भाजपा को कटघरे में खडा करने का जो खतरनाक खेल खेला था वह विधानसभा चुनाव से पूर्व ही बेपर्दा हो गया था और यह बात भी साफ हो गई थी कि बेजुबान शक्तिमान को मोहरा बनाया गया था? गणेश जोशी पर दर्ज मुकदमा भले ही सरकार ने वापस ले लिया हो लेकिन इस राज से भी पर्दा उठना चाहिए कि आखिरकार शक्तिमान की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आखिरकार मौत का कारण क्या था?

 

बेजुबान की मौत एक राज बनकर क्यों रह गई इसको लेकर उत्तराखण्ड से लेकर विदेश में रहने वाले उत्तराखण्डवासियों के मन में जिज्ञासा है कि अगर इस मामले में सरकार सीबीआई से ही जांच करा ले तो क्या पता जो दाग गणेश जोशी के दामन पर लगा था वो दाग किसी और राजनेता के दामन पर ही न लग जाये?

 

गजब बात तो यह थी कि शक्तिमान को लेकर जहां कांग्रेस के कुछ नेताओं ने अपनी मीडिया की टीम के सहारे बेजुबान की दिल दहला देने वाली तस्वीरें सोशल मीडिया में एक के बाद एक वायरल की उसी से यह बात साफ हो रही थी कि शक्तिमान का जो हश्र होगा वो तो भविष्य ही तय करेगा लेकिन कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने शक्तिमान को पूरी तरह से अपना मोहरा बनाया

 

और पुलिस लाइन में शक्तिमान के नाम से पैट्रोल पम्प खोल दिया गया और उसकी प्रतिमा भी वहां लगा दी गई तथा शक्तिमान पर राजनीति करते हुए रिस्पना पुल पर उसका एक बडा स्टैचू रातो-रात लगाया गया लेकिन अचानक तडके के अंधेरे में शक्तिमान का स्टैचू रिस्पना पुल से गायब कर दिया गया तो उसके बाद यही सवाल खडे हुए कि आखिरकार ऐसा क्या हो गया कि शक्तिमान का स्टैचू भी हटाना पड गया। यह स्टैचू किसके पैसों से बनाया गया यह भी एक राज बनकर रह गया और सवाल उठे कि क्या टांग टूटने से शक्तिमान की मौत हुई थी?

 

शक्तिमान के पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में ऐसा क्या सच छुपा हुआ है जिसे पूर्व सरकार ने उजागर करने के लिए अपने कदम आगे नहीं बढाये? एक बेजुबान की मौत का राज जरूर खुलना चाहिए जिसको लेकर भाजपा विधायक गणेश जोशी ने भी मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है।

 

सवाल यह है कि आखिरकार पूर्व सरकार ने पहले शक्तिमान के सहारे विधानसभा का चुनाव जीतने का सपना पाला और बाद में उस शक्तिमान की परछाई से भी पूर्व मुख्यमंत्री क्यों डरने लगे थे यह भी रहस्य आज तक किसी की समझ में नहीं आया? बेजुबान शक्तिमान मर गया और उसकी मौत का दाग झेल रहे भाजपा विधायक से सरकार ने मुकदमा भी वापस ले लिया लेकिन यह राज तो बेपर्दा होना ही चाहिए कि शक्तिमान की मौत कैसे हुई थी।