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छोटे कारोबारियों को सताने लगी है लोन की चिंता

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मुंबई । पीएनबी में हजारों करोड़ के फर्जीवाड़े के बाद लघु उद्योगों, जूलर्स और एक्सपोर्टर्स को बैंक कर्ज और अन्य सेवाओं में दिक्कतों की आशंका सताने लगी है। लेटर ऑफ अंडरटेकिंग पर बिना टैक्स चुकाए निर्यात करने से लेकर सप्लायर्स को भुगतान करते आ रहे आम निर्यातकों को अब पूरे सिस्टम में ही बदलाव के आसार दिख रहे हैं।

सबसे ज्यादा मार एमएसएमई सेक्टर पर
ऑल इंडिया जेम्स ऐंड जूलरी ट्रेड फेडरेशन के चेयरमैन नितिन खंडेलवाल ने बताया, ‘वैसे तो इस घोटाले की मार सबसे ज्यादा एमएसएमई सेक्टर पर पड़ेगी, लेकिन छोटे जूलर्स के लिए अब वित्तीय मदद के रास्ते काफी तंग हो जाएंगे। वे पहले ही कई तरह की बंदिशों से गुजर रहे थे, अब कदम कदम पर कागजी औपचारिकताएं और बहाने सुनने को मिलेंगे।’ उन्होंने कहा कि इससे यह भी पता चलता है कि जब एक कंपनी को 13,000 करोड़ से ज्यादा दे दिए गए तो बाकी इंडस्ट्री को देने के लिए बैंक के पास बचा ही क्या होगा।

मार्केट में दहशत
घोटाले की जांच में लगी एजेंसियां दिल्ली में भी गीतांजलि के शोरूमों और फ्रेंचाइजी ओनर्स के यहां छानबीन में जुटी हैं। करोलबाग के एक जूलर ने बताया कि जूलरी ब्रैंड की सप्लाई चेन से जुड़ी दर्जनों यूनिटों और कारीगरों के अकाउंट की जांच और पूछताछ हो रही है। इससे मार्केट में दहशत है। उन्होंने कहा, ‘पिछले दो साल से जूलरी बिजनेस को कई चुनौतियां का सामना करना पड़ रहा है। नोटबंदी, इनकम टैक्स रूल्स, जीएसटी के बाद अब इस घोटाले ने हर ज्वैलर को शक के दायरे में ला दिया है।’

ऑडिट पर भी सख्ती
फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज के मेंबर और मैन्युफैक्चरर सतीश जैन ने कहा, ‘केंद्रीय स्कीम के तहत 1.5 करोड़ तक कोलैटरल फ्री लोन का प्रावधान है, फिर भी हम 10-20 पर्सेंट सिक्योरिटी रखते ही आ रहे हैं। अब कोई भी बैंक हमें बिना सौ फीसदी सिक्योरिटी के लोन नहीं देगा।’ उन्होंने कहा कि सरकार एमएसएमई सेक्टर को हाल के वर्षों में दिए गए लोन की डिटेल्स जारी करे और हर बैंक का सालाना वित्तीय कोटा और लक्ष्य तय करे। ऑडिट पर भी सख्ती की जाए।

निर्यातकों को यह चिंता भी सता रही है कि कई मकसद से दी जाने वाली लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) की सुविधा पर भी निगरानी तेज हो सकती है। अगर बैंकों ने एलओयू पर सख्ती की तो कई निर्यातकों के लिए मार्केट में बने रहना ही मुश्किल हो जाएगा।

फर्जीवाड़े से कमाए पैसे
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने सोमवार को केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान को ज्ञापन देकर कहा कि कई कंपनियां फर्जीवाड़े से कमाए पैसे को विज्ञापन और सेलेब्रिटीज पर लुटाती हैं, जिससे उनका कारोबार और चमकता है। भ्रामक विज्ञापनों में इन सेलेब्रिटीज की भूमिका पर लगाम कसने की जरूरत है। ऐसे में सरकार उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम को संसद के इसी सत्र में पास कराकर ब्रांड एंबेस्डर्स और विज्ञापन करने वाले सेलेब्रिटीज को कानून के दायर में लाए।