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स्विस बैंक में खोलिए जीरो बैलेंस अकाउंट,जाने कैसे !

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उदय दिनमान डेस्कः स्विस बैंक में खोलिए जीरो बैलेंस अकाउंट,जाने कैसे ! जी हां ऐसा हो सकता है और आपको इसके लिए सरकार से परमिशन लेने की भी जरूरत नहीं है। बस बैंक की कुछ शर्तं है जिनका आपको पालन करना है। भारत में बैंकों की तानाशाही और उस पर सरकार को नियंत्रण! ऐसे में लोग शायद विदेशी बैंकों का रूख इसीलिए कर रहे है!

चलिए आपको बताते है विस्तार से कि आपको क्या करना है।स्विस बैंक में अपना अकाउंट खोलना कौन नहीं चाहता होगा? स्विस बैंक के नाम से डरने की ज़रूरत नहीं. आप घर बैठे अपना अकाउंट वहां खुलवा सकते हैं, वह भी जीरो बैलेंस पर. मगर बात इतनी सी नहीं है. स्विस बैंक में अकाउंट खुलवाने के बाद आपको कुछ शर्तें भी पूरी करनी होंगी.

हम आपको बता रहे हैं कि आख़िर स्विट्जरलैंड के बैंक में अपना अकाउंट खुलवाने के लिए क्या क्या करना होगा?
असल में स्विस बैंक का कामकाज उतना रोमांचक नहीं है, जैसा उन्हें जासूसी फिल्मों और एक्शन थ्रिलर्स में दिखाया जाता है. वे बेहद अच्छी तरह से चल रहे प्रभावशाली निजी बैंक जैसे ही हैं. हर बैंक के पास खाता खोलने के अपने नियम होते हैं, लेकिन यह जानने के लिए कि आपको बुनियादी जानकारी और दस्तावेजों की जरूरत होगी.

अगर आपको यह पता चल जाए तो आपको अपना स्विस बैंक खाता सेट करने में मदद मिल सकती है. स्विस बैंक कोई एक बैंक नहीं है. स्विस बैंक उन सभी बैंकों को कहा जाता है जिनपर स्विट्ज़रलैंड के कानून लागू होते है. यू.एस.बी ग्रुप, क्रेडिट ससी ग्रुप, जुलिएस बेयर ग्रुप स्विट्ज़रलैंड के बड़ें बैंकों में से हैं.

 बैंक अकाउंट खोलने की योग्यता
स्विस कानून के अनुसार अगर आप स्विस बैंक में अकाउंट खोलना चाहते हैं तो आपकी उम्र 18 साल से ऊपर होनी चाहिए. आपको ताज्जुब होगा कि भारतीय बैंकों के जो नियम कानून हैं, वैसे स्विस बैंकों में नहीं हैं.

आप अपना अकाउंट किसी एक ही करंसी में खोल सकते हैं – स्विस फ्रैंक, डॉलर, यूरो या स्टर्लिंग. मजे की बात यह है कि आपको अकाउंट खोलने के लिए मिनिमम बैलेंस भी नहीं चाहिए. एक बार जब आप पैसा जमा करना शुरू कर देते हैं, तो तब आपको मिनिमम बैलेंस रखना होता है, जो फिर बैंक तय करता है.

स्विस बैंक अकाउंट चुनने से पहले आप तय करें कि आप कैसा इन्वेस्टमेंट चाहते हैं. अगर आपको अपने पैसे की प्राइवेसी को लेकर चिंता है, तो ऐसा कोई बैंक न चुनें जिसकी एक भी ब्रांच भारत में हो. बैंक ब्रांच को हमेशा अपने देश का कानून मानना होता है. अगर आपका स्विस बैंक भारत में भी है, तो वह किसी भी आम बैंक से अलग नहीं है.

आपका अकाउंट इससे तय होगा कि आप कितना पैसा अकाउंट में लगातार डालना चाहते हैं. जितना ज़्यादा बड़ा आपका इन्वेस्टमेंट प्लान होगा, उतना ही आपको सेविंग या इंवेस्टमेंट अकाउंट मिलेगा. आप स्विस बैंकों में सेफ डिपॉजिट भी खोल सकते हैं.

अगर आप अपना अकाउंट स्विस फ्रैंक में खोलते हैं, तो आपको बहुत कम इंटरेस्ट मिलेगा और आपके ऊपर टैक्स भी लगेगा. लेकिन, अगर स्विस बैंक में आप किसी और देश की करेंसी में अकाउंट में खोलते हैं, तो आपका पैसा फंड मार्केट में लगाया जाता है और उस पर आप मोटा इंटरेस्ट कमा सकते हैं.

वैसे तो खुद जाकर अकॉउंट खोलना सबसे अच्छा है, लेकिन आप ईमेल या फैक्स के ज़रिये भी अकाउंट खोल सकते हैं. कई प्राइवेट फर्म अकॉउंट खोलने में आपकी मदद कर सकती हैं. स्विस मनी लॉन्डरिंग कानून के अनुसार आपको बताना होता है कि आपका पैसा कहां से आ रहा है. यह सबूत देने की बाद आप अकाउंट में पैसा जमा कर सकते हैं.

डॉक्यूमेंट आपको चाहिए
– पासपोर्ट कॉपी
– टैक्स रिटर्न
– कंपनी के कागज़ात
– काम करने के लाइसेंस
– डिपॉजिट प्रूफ
– डिपाजिट स्लिप्स
– चेक
– बर्थ सर्टिफिकेट

सभी डाक्यूमेंट्स पर नोटरी की सील होनी चाहिए. इस नोटरी को स्विस बैंक अपोस्टिल कहते हैं. हर एक कागज के लिए अपोस्टिल होना बेहद जरूरी है.

नंबर अकाउंट वे खुफ़िया अकाउंट हैं, जिनमें अकाउंट धारक का नाम नहीं होता, मगर नंबर वाले अकाउंट के लिए आपको खुद बैंक जाना होगा. आपको कम से कम एक लाख डॉलर यानी लगभग 70 लाख रुपये जमा करने होंगे और हर साल उन्हें बढ़ाना भी होगा. इस अकाउंट पर सालाना 20 हज़ार रुपये खर्च आता है. इसके बावजूद आपको यह जानना चाहिए कि नंबर अकॉउंट भी पूरी तरह खुफ़िया नहीं होते. नंबर और नाम के बेच के कनेक्शन से बहुत बार डेटा लीक हो जाता है.

स्विस बैंक से पैसा निकालने के लिए सबसे ज़्यादा क्रेडिट कार्ड का ही इस्तेमाल होता है. क्रेडिट कार्ड से आप न केवल शॉपिंग कर सकते हैं, बल्कि दुनिया में कहीं भी किसी भी एटीएम से पैसा निकाल सकते हैं. मगर क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल से यह ट्रैक किया जा सकता है कि आपके पास स्विस बैंक अकाउंट है.

आम क्रेडिट कार्ड की तरह आपके पास स्विस बैंक के क्रेडिट कार्ड का स्टेटमेंट बैलेंस नहीं आता. आपको अपनी ज़रूरत के अनुसार दुगुना पैसा क्रेडिट कार्ड में डालना होता है, ताकि आप आगे उसे इस्तेमाल करते रहें. इसे सिक्योरिटी डिपॉजिट कहते हैं और बैंक इस सिक्योरिटी डिपॉजिट को भी फंड बाजार में निवेश कर पैसा कमाते हैं.

स्विस बैंक से आप कभी भी चाहे जितना कैश निकाल सकते हैं. बैंक और सरकार आप पर कोई सीमा तय नहीं करती. यही नहीं, आप चाहें जो अपनी पासबुक से सारे रिकॉर्ड भी मिटा सकते हैं.

बैंक ट्रांसफर के लिए आपको किसी भी आम बैंक की तरह पैसे का लेनदेन अपने अकाउंट से करना होता है. लेकिन इससे भी यह ज़ाहिर हो जाता है कि आपके पास स्विस बैंक अकाउंट है. इसलिए आपको यहां बचाने के लिए स्विस बैंक खुद बैंक के नाम पर ट्रांसफर कर देता है. इस किस्म का ट्रांसफर बहुत सारे देशों में स्विट्ज़रलैंड के बाहर वैध नहीं है.

स्विस बैंक में चेकबुक रखना भी खतरे से खाली नहीं है. यह सबसे आसान तर्क है जिससे सूचना लीक होती है. कोई भी स्विस बैंक अकाउंटधारक चेकबुक इस्तेमाल नहीं करता.स्विस बैंक अकाउंट बैंक करना आम बैंक अकाउंट बंद करने से भी आसान है. आपको केवल एक अर्ज़ी देनी होती है, जिसके बाद तुरंत आपका पूरा पैसा आप जिस तरह चाहते हैं वैसे बैंक से ले सकते हैं.
भारत में जो एचएसबीसी है उसकी ब्रांच स्विट्ज़रलैंड में भी है

एचएसबीसी (हांगकांग एंड शंघाई बैंकिंग कारपोरेशन) एक मल्टीनेशनल बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनी है. इसका मुख्यालय लंदन में है. यह दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बैंक है. दुनिया के 85 देशों में इसकी 7200 से ज्यादा शाखाएं हैं. दुनिया भर में इसके 40 लाख से ज्यादा ग्राहक हैं. एचएसबीसी में बचत खाता खोलने के लिए प्रतिमाह औसत राशि 75000 रुपये होने की शर्त है. ऐसे में बैंक के पास हमेशा ही धनी ग्राहक पहुंचते हैं. बदले में बैंक ग्राहकों को खास सुविधाएं देता है.

खुफिया अकाउंट?
आपको को सिर्फ एचएसबीसी से फोन पर संपर्क करने की जरूरत होती है. इसके बाद बैंक अपना एक व्यक्ति संपर्क करने वाले के पास भेजता है. वह व्यक्ति सिर्फ एक फॉर्म भरवाता है और अपने साथ पैसे ले जाता है. यह पैसा जेनेवा या दुबई में बैंक की शाखा में जमा कर दिया जाता है. इस प्रकार खाता खुल जाता है. खाता खोलने के लिए विदेश जाने की जरूरत नहीं पड़ती. इसी प्रकार खाते से लेन-देन भी घर बैठे हो जाता है.

खाताधारक को बैंक जेनेवा शाखा के एक व्यक्ति का फोन नंबर देता है. पैसा जमा कराने के लिए उस व्यक्ति को फोन करना होता है और एचएसबीसी का प्रतिनिधि आकर पैसा ले जाता है. रुपये में दी गई रकम के बराबर डॉलर स्विस खाते में पहुंच जाते हैं. इसके विपरीत अगर पैसा निकलवाना हो तो जेनेवा फोन कर देने मात्र से भारत में एचएसबीसी का प्रतिनिधि मांगी गई रकम दे जाता है.

(साभार- न्यूज-18 व आंशिक संपादन किया गया है।)