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स्विट्जरलैंड में सोना और चॉदी को बहाते हैं लोग गंदी नालियों में!

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यहां की नालियों में मिले करोड़ों रूपये के सोने और चांदी धातुओं के सूक्ष्म कण,इसकी कीमत करीब 20 करोड़ रुपए आंकी गई

उदय दिनमान डेस्कः स्विट्जरलैंड में सोना और चॉदी को बहाते हैं लोग गंदी नालियों में! यह अपने आप में अनोखा देश ही होगा जहां के लोग ऐसा करते हैं। माना की यह देश आर्थिक रूप से संपन्न है पर फिर भी ऐसा…। चलिए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से-

 

कहते हैं कि आपके पास अगर सोना-चॉदी , गाडी -बंगला तो आप संपन्न है । यह सोच इस समाज की है। खासकर विकासशील देशों में तो ऐसा ही है। वही विकसित देशों में ठीक इसके उलट है। यहां के लोग सोना-चॉदी, गाडी और अंगला इसे प्राथमिकता नहीं देते वह अपने विजन को प्राथमिकता देते हैं। यही कारण है कि ये देश विकसति की श्रीणी में आते हैं। सोशल मीडिया पर एक खबर आयी कि लोग सोना-चॉदी को नाली में बहाते हैं। तो अजीब लगा।

 

वहीं दूसरी ओर भारत जैसे देश में संपन्नता का प्रतीक सोना-चॉदी के साथ-साथ गाडी -बंगला हो तो आप संपन्न है और अगर आपके आसपास कोई गरीब या मध्यम वर्ग का परिवार रहता हो तो आप उसके नजदीक नहीं जाते हैं।हमारे देश में तो संपन्न लोग संपन्न होते रहते हैं और गरीब-गरीब होता चला जाता है। यह हमारी व्यवस्था की कमी है या फिर सरकार की कुछ सभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। इसके बाद भी इस देश में विकास तेज गति से चल रहा है।

चलिए आपको बताते हैं कि दुनिया के संपन्न देशों में शुमार स्विट्जरलैंड के नाले भी यहां की संपन्नता को बयां करते हैं। इस देश के नालों में हर साल करोड़ों रुपए का सोना-चांदी बहा दिया जाता है। शोधकर्ताओं ने पिछले साल जलशोधन संयंत्रों से निकली गाद से तीन टन चांदी और 43 किलो सोना खोज निकाला। इसकी कीमत 31 लाख डॉलर (करीब 20 करोड़ रुपए) आंकी गई।

 

हालांकि यह जानकारी सामने आने के बाद लोग अपने इलाके की नालियों में इन महंगी धातुओं की खोज में जुटते इससे पहले ही शोधकर्ताओं ने साफ कर दिया कि ये धातुएं सूक्ष्म कणों के रूप में मिली हैं। ये संभवतः घड़ियों, दवा और रासायनिक कंपनियों से निकले हो सकते हैं। ये कंपनियां उत्पादों के निर्माण और प्रक्रिया में इन धातुओं का उपयोग करती हैं।

 

सरकार की ओर से कराए गए इस अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता बेस वेरिएन्स ने कहा, ‘आप ऐसे सनकी पुरुषों और महिलाओं के बारे में अक्सर ही सुनते होंगे जो अपने गहने टॉयलेट में फेंक देते हैं लेकिन हमें दुर्भाग्य से कोई अंगूठी भी नहीं मिली।’ सबसे ज्यादा सोना पश्चिमी स्विस क्षेत्र जुरा से पाया गया। माना जा रहा है कि इसका संबंध घड़ी निर्माता कंपनियों से है। ये कंपनियां महंगी घड़ियों की सजावट में सोने का इस्तेमाल करती हैं।

 

सोशल मीडिया पर इस खबर के आने के बाद लोगों द्वारा इसके बारे में जानकारी इकत्र करने की कोशिशे की जा रही हैं आखिर ऐसा कैसे होता है। वहीं अगर भारत की बात करें तो यह इस देश में ज्यादा होना चाहिए था। क्योंकि यहां की सभी नदियां भी गंदे नालों की शक्ल ले रखे हैं और हम लोग भी गंगा सहित अन्य नदियों में सोना और चांदी समाहित करते हैं, लेकिन यह कहा चला जाता है कुछ पता नहीं चलता।