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टीम इंडिया: वर्ल्ड कप 2019 का क्या है प्लान?

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डरबन। भारत और साउथ अफ्रीका के बीच गुरुवार से शुरू हुई वनडे सीरीज के पहले मैच में टीम इंडिया ने वर्ल्ड कप 2019 को लेकर की जा रही अपनी प्लानिंग की झलक दिखा दी। टीम इंडिया इन दिनों अपने दो युवा स्पिनर्स (कुलदीप यादव और युजवेंद्र चहल) के साथ मैदान में उतरती है। ये दोनों ही गेंदबाज अपने प्रदर्शन से सभी को लगातार प्रभावित कर रहे हैं और वर्ल्ड कप से पहले इन दोनों स्पिनर्स को विश्वास देने का यह सही समय है।

दक्षिण अफ्रीकी पारी के दौरान एक समय एम. एस. धोनी को यह कहते हुए सुना गया, डाल, डाल। 6 बॉल इसको समझने में निकल जाएगा यह वाकया उस समय का है, जब साउथ अफ्रीकी बल्लेबाज डेविड मिलर जेपी ड्यूमिनी के आउट होने के बाद मैदान पर आए थे। इस दौरान साउथ अफ्रीका का स्कोर 122/4 था, तब एक छोर से चाइनामैन बोलर कुलदीप यादव और दूसरे छोर से युजवेंद्र चहल लेग ब्रेक गुगली से अटैक कर रहे थे।

इस बात में कोई दोराय नहीं कि टीम इंडिया ने इस पिच को बखूबी पढ़ लिया था और इसीलिए टीम में दो स्पिनर्स होने के बावजूद कोहली ने कुछ ओवर पार्ट टाइम ऑफ ब्रेक बोलर केदार जाधव से भी कराए। पिछले 6 महीने की अगर बात करें, तो बोलिंग कोच भरत अरुण ने टीम के बोलिंग संसाधनों की तस्वीर साफ कर दी है। 5 दिवसीय मैचों के लिए अपनी पेस बेटरी का सहयोग करने के लिए टीम इंडिया क्लासिक फिंगर स्पिन की मदद लेती है और रिस्ट स्पिन को वह वनडे और टी20 क्रिकेट में अपना हथियार बनाती है।

इसके साथ-साथ पिच की कंडीशंस को पढक़र उसके अनुसार मैच की रणनीति भी तय की जाती है। भारतीय टीम अनऑर्थोडोक्स स्लो बोलर पर भी फोकस कर रही है। भरत अरुण बताते हैं, उदाहरण के तौर पर आप कुलदीप यादव को ही ले लें। वह टीम के लिए एक शानदार विकल्प है। अभी वह बहुत युवा है और उसे बहुत लंबा सफर तय करना है, लेकिन वह शानदार है।

कुलदीप और चहल की सबसे शानदार बात यह है कि जब वे दोनों बोलिंग कर रहे होते हैं, तो वह विकेट चटकाने का मौका जरूर तलाशते हैं। वे डिफेंसिव अप्रोच अपनाने के बजाए बल्लेबाजों पर चांस लेते हैं। वे गेंद से लड़ते हैं, विकेट्स के लिए जाते हैं। वह सबकुछ करने के लिए तैयार रहते हैं और इसके अलावा स्लो विकेट्स पर टीम के पास केदार जाधव के रूप में भी उम्दा विकल्प है। ऐसी धीमी पिचों पर जाधव भी उपयोगी बन जाते हैं क्योंकि उनकी बॉल बल्लेबाज के बैट पर नहीं आती।

तीन महीने पहले जब उन्होंने अपनी इस बोलिंग से न्यू जीलैंड के खिलाफ खेली गई सीरीज में जिम्मी नीशम और टॉम लेथम के विकेट लिए, तब वह फोकस में आए। भले ही उनका बोलिंग ऐक्शन कुछ अजीब लगता हो, लेकिन टीम के लिए उनकी बोलिंग शानदार है। यह भारत का एक ऐसा बोलिंग अटैक डिवेलप हो रहा है, जिसे टीम इंडिया अपने वर्ल्ड कप मिशन के लिए तैयार करना चाहेगी, जो अब सिर्फ 16 महीने दूर है।

टीम इंडिया के बोलिंग अटैक में विविधता को बोलबाला है। गुरुवार को खेले गए मैच की अगर बात करें, तो यहां टीम के पास लेफ्ट आर्म ऑर्थोडॉक्स स्पिनर अक्षर पटेल के रूप में भी विकल्प था। हालांकि अक्षर बेंच पर ही बैठे। साउथ अफ्रीका दौरे पर गई टीम इंडिया की अगर बात करें, तो इस 15 सदस्यीय टीम में भारत के पास 11 बोलिंग ऑप्शन्स हैं। ये टीम के लिए कुछ ऐसे रिजर्व हथियार हैं, जैसे किसी सेना के पास रिजर्व हथियारों का जखीरा होता है।