udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news utt/उत्तराखंड: झूठे वायदो से आदर्श गांव की संकल्पना साकार होगी!

utt/उत्तराखंड: झूठे वायदो से आदर्श गांव की संकल्पना साकार होगी!

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…..मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि जब तक किसी भी अन्याय के खिलाफ पूरे देश की एक आवाज नहीं उठती तब तक मैं समझता हूँ कि 2 अक्टूबर 1994 की जैसी घटनाओं के शर्मनाक काण्डों की पुनरावृति होती रहेगी, देश के किसी खण्ड में अगर किसी के साथ अन्याय हो रहा है, तो उसके विरूद्व पूरे देश की आवाज उठे! उसी से देश की एकता अखण्डता का परिणाम मिलने के साथ देश की मजबूती भी संभव हो सकती है, और अगर हम भाषा, प्रान्त, पूरब पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, जाति-पाति के संकीर्ण दायरों में सिमट कर खामोश रहेंगे, तो यह पूरे देश और देश की जनता के लिए अत्याधिक खतरनाक साबित होगी। मेरी भावनायें और विचारों पर मनन करना, जनता और देश के शासक के लिए आज के परिप्रेक्ष्य में बहुत आवश्यक है, क्योकि स्थिति निरंतर बिगड़ती जा रही है जो देश के लिए ठीक नहीं है…… एक क्रान्तिकारी लेखक के रूप में शहीद यशोधर बेंजवाल का यह लेख राज्य आन्दोलन के संघर्श में क्रांति की नई इबारत लिख गया। उत्तराखण्ड आन्दोलन के दौरान श्रीनगर गढ़वाल के श्रीयंत्र टापू में 10 नवम्बर 1995 को पुलिस बर्बरता के शिकार हुये यशोधर बेंजवाल ‘अकेला’ प्रखर क्रान्तिकारी के साथ एक कलाकार भी थे। उन्होने अपनी सारी भावनाओं को कागज में दर्ज किया, क्रान्तिकारी गीत, वैचारिक लेख, गजल व काव्य में अपनी मनोभावनाएं उतारने का बड़ा शौक इन्हें हमेशा से रहा। गढ़वाल मंण्डल के तल्ला नागपुर पट्टी के बेंजी गांव के बेहद साधारण परिवार में पं0 मित्रानंन्द बेंजवाल एवं श्रीमती धूमा देवी बेंजवाल के घर में इनका जन्म हुआ। परिवार में इनके एक भाई छः बहिन थे। परिवार आम पहाड़ी परिवारों की तरह बेहद साधारण था, यजमानीवृत्ति तथा कृषि ही परिवार में आय का श्रोत था। इनकी प्रारम्भिक शिक्षा दीक्षा गांव के ही प्राथमिक विद्यालय में हुई। अध्ययन के कुछ वर्षो बाद तक ये चोपता में भी रहे जहाँ इनकी फोटोग्राफी की दुकान भी रही। फोटोग्राफी का इन्हें बचपन से बेहद शौक रहा था, तब उसे व्यवसाय के तौर में अपनाने से इन्हें संतुष्टि मिली लेकिन व्यवसाय कुछ खास अच्छा नहीं चल पाया जिस कारण ये जल्दी ही इसे छोड़ कर अपने बड़े भाई के साथ अमृतसर चले गये। लेकिन परदेष में मन नहीं रमा, वहाँ से पुनः श्रीकोट में अपना मेडिकल स्टोर खोल कर परिवार का भरण पोषण करने लगे। अगस्त 1994 में पृथक राज्य के गठन के लिए उत्तराखण्ड आन्दोलन ने जोर पकड़ा तो शहीद यशोधर को लगा कि उसे अपनी राह मिल गई तब वे 2 अक्टूबर 1994 की दिल्ली रैली में पहाड़ से दिल्ली पहुंचकर राजघाट पर आत्मदाह के लिए निकल पड़े, लेकिन पुलिस को इसकी भनक लग गई थी और उन्हें गिरफ्तार करके तिहाड़ जेल में भेज दिया गया। तिहाड़ जेल में शहीद के मित्र शिव प्रसाद पुरोहित जब इनसे मिलने पहुचे तो इन्होने कहा था-‘‘इस समय तो भेंट करने जेल में आये हो किन्तु मेरा अगला कदम ऐसा होगा कि तुम मुुझसे भेंट नहीं कर सकोगे’’ आखिर ऐसा ही हुआ भी था। जिसकी परिणति में दर्दनाक श्रीयंत्र टापू कांड छिपा था। इन सबके बीच इनके शौक हमेशा जिंदा रहे मसलन कविताएं लिखना और किताबे पढ़ना, ये शहीद भगत सिंह को अपना आदर्श मानते थे और देश के प्रति एक बेहतरीन सोच रखने में विश्वास रखते थे। हाँ जीवन जीने की तमाम परेशानियों और बड़े परिवार के बीच सीमित आमदनी ने कई बार परेशान भी किया लेकिन इनका मजबूत दिल हरेक परेशानी को झेलने का भी आदी बन गया था। ऐसे नाजुक दौर में भी उनकी कविताओं में कही निराशा या बेचारगी नहीं थी। शहीद की कविताएं हिम्मत जगाती है। जिसमें निडरता के साथ हक को पाने की प्रेरणाएं भरी हुई है।
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यशोधर बेंजवाल की दो कविताएं
हम सलाखों के पीछे भी खुश हैं
ऐ वतन तेरे लिए,
कब तक सहेंगे जुल्मो सितम
इस देश के हुक्मरानों के
एक आवाज बना एक ही तुम साज बनो।
कोई मुश्किल नहीं है बदलनी व्यवस्था
अगर संकल्प सभी का एक हो
इन काले अंग्रेजों से मुक्ति दिलानी है देश को।
वर्ना कुछ भी हो जायेगा
आजादी का मतलब खो जायेगा
शहीदों से हम शर्मिदा होंगे
और देश गुलाम फिर से हो जायेगा
2.
चिल्लाने से भी नहीं पड़ा
उनकी नीदों में खलल
महलों में बंद किवाड़ों पे
अब मूसल बरसाने होंगे
कौन तुम्हें अधिकार उपहार में देगा
ये ऐसा लोकतंत्र है
जहाँ हमको भाले बरसाने होंगे।
नहीं अभी तक है कोई पहचान हमारी
बस उनके लिए
सरहद पर मरने तक की है बारी
अब हाथों में कलम नहीं हथियार उठाने होंगे।
(तिहाड़ जेल में शहीद यशोधर बेंजवाल द्वारा रचित कविता अंश )
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सेवा मंे,
श्रीमान् जिलाधिकारी महोदय / मुख्यमंत्री / विधायक रूद्रप्रयाग
रूद्रप्रयाग

विषय: उत्तराखण्ड शहीद आदर्श ग्राम योजना के अर्न्तगत ग्राम सभा बेंजी में अवस्थापना विकास हेतु मांगपत्र।

महोदय,
सविनय निवेदन है कि उत्तराखण्ड शहीद आदर्श ग्राम योजना के अर्न्तगत चयनित ग्राम सभा बेंजी में निम्न मांगों पर संस्तुति प्रदान करने की कृपा करें –
1. उत्तराखण्ड शहीद की अविरल स्मृति हेतु राजकीय महाविद्यालय रूद्रप्रयाग का नामकरण उत्तराखण्ड शहीद यशोधर बेंजवाल के नाम पर किए जाने हेतु स्वीकृति प्रदान की जाए।
2. उत्तराखण्ड शहीद यशोधर बेंजवाल की पुण्य स्मृति में शहीद के पैत्रक गांव बेंजी में मूर्ति स्थापना/स्मारक निर्माण हेतु स्वीकृति प्रदान करें, इस महान कार्य हेतु भूमि ग्राम सभा द्वारा निशुल्क प्रदान की जायेगी।
3. शहीद की स्मृति को चिरस्थायी स्वरूप प्रदान करने के लिए प्रतिवर्ष 22 जून को ग्राम सभा बेंजी में उत्तराखण्ड शहीद यशोधर बेंजवाल स्मृति मेला के आयोजन हेतु वित्तीय अनुदान प्रदान किया जाए।
3. तिलवाड़ा बावई सड़क निर्माण के उपरांत क्षेत्र के केन्द्र बिन्दु ग्राम बेंजी में पोस्टआफिस की स्वीकृति प्रदान की जाए जिसमें सौड़भट्ट, कोयलपुर, डांगी, गुनाऊ, बद्रीकोट, बमोली, कर्णधार, मालकोटी, कुमोली, कर्णधार को लाभान्वित ग्राम के रूप में सामिल किया जाए।
4. ग्राम सभा बेंजी में स्वास्थ्य उप केन्द्र की स्थापना की जाए जिसमें सौड़भट्ट, कोयलपुर, डांगी, गुनाऊ, बद्रीकोट, बमोली, कर्णधार, मालकोटी, कुमोली को लाभान्वित ग्राम के रूप में सामिल किया जाए।
5. तिलवाड़ा बावई पीएमजीएसवाई योजना तहत ग्राम सभा बेंजी में तीन बार धवस्त हो चुके पुस्ते का पक्का निर्माण न होने से गाँव के असतित्व पर खतरा मंडरा रहा है, अनके बार सम्बधित विभाग से लिखित व मौखिक ज्ञापन के अनुरोध पर भी इस हेतु कोई ठोस कार्यवाही नहीं हो पाई है। पूर्व मंे इस पुस्ते के ढहने से गांव के एक आवासीय भवन समेत एक गौशाला को गंभीर नुकसान हुआ था लेकिन विभाग द्वारा इसका मुआवजा प्रदान नहीं किया गया बावजूद विभागीय अधिकारीयों द्वारा मौका मुआवयना कर पुस्ते का पुनः कच्च निर्माण करवाया गया है। महोदय इस पुस्ते के पक्के निर्माण के साथ साथ भविष्य की सुरक्षा के लिए गाँव की सीमा में सड़क के किनारे जल निकास नाली का पक्का निर्माण किया जाए।
6. पीएमजीएसवाई योजना के निर्माण के दौरान क्षतिग्रस्त ग्राम सभा बेंजी के संपर्क मार्गो के पुनर्निमाण हेतु कार्यदायी संस्था को ओदिशत किया जाए।
6. ग्राम बेंजी में सार्वजनिक स्थानों पर उरेडा द्वारा निःशुल्क सोलर स्ट्रीट लाईट लगाने की स्वीकृति प्रदान जाए।
7. ग्राम बेंजी में सार्वजनिक कार्य हेतु एक सामुदायिक भवन हेतु वित्तीय स्वीकृति प्रदान की जाए।
8. वन पंचायत की बंजर भूमि पर उद्यान विभाग द्वारा योजनाए संचालित की जाए।
9 ग्राम पंचायत बेंजी के वोडा गदेरा पर पुल निर्माण हेतु स्वीकृति प्रदान की जाए।
10. ग्राम पंचायत बेंजी में जिला स्तरीय संस्थान जैसे नवोदय विद्यालय, पॉलीटेक्नीक, आटीआई अथवा अन्य सरकारी संस्थानों को खोला जाए।
11. एक वर्ष में राज्य सरकार की किसी भी एक योजना से गांव को पूर्ण लाभ दिया जाय।

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दो साल पूर्व मुख्यमंत्री हरीष रावत ने सहीद आदर्ष ग्राम की घोसण की थी, तीन बार इस विसय में बैठक भी हो चुकी है, मेरे गांव के ग्रामीणों ने 11 सूत्रीय मांगों का एक ज्ञापन भी दिया था लेकिन दो साल में एक भी मांग पूरी नहीं हो पाई, यहां तक एक स्मारक निर्माण तक के लिए पैसा नहीं दिया गया, क्या इसी प्रकार की कोरी घोसणाओं से सहीदो का सम्मान होगा क्या इसी झूठे वायदो से आदर्स गांव की संकल्पना साकार होगी

– दीपक बेंजवाल, सचिव, उ0सहीद स्मृति संस्था, बेंजी

सेवा में,
श्रीमान् हरीश रावत जी
माननीय मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड
विषय: उत्तराखण्ड शहीद आदर्श ग्राम योजना के अर्न्तगत शहीद गांवों को विशेष प्राथमिकता देने के संदर्भ में अनुरोध पत्र।
महोदय,
यह बेहद सम्मान का विषय है कि आपने उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के शहीदों के पैत्रक गांवों को आदर्श गांव बनाने की महत्वकांक्षी योजना का श्रीगणेश किया है, मातृभूमि से जुड़ी आपकी इस सोच से हम समस्त राज्यवासी स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे है। हमारा गांव भी इस योजना के अंर्तगत चयनित हुआ है। जिसके लिए हम शहीद परिजन एवं ग्रामवासी आपका हृदय से आभार व्यक्त करते है।
महोदय मैं आपको यह पत्र इसलिए भी लिख रहा हूँ क्योंकि आप जनभावनाओं का सम्मान करते है। महोदय शहीद की शहादत को चिरस्थायी बनाने के लिए हमारी संस्था पिछले 9 साल से बिना किसी सरकारी अनुदान और संसाधन के शहीद की स्मृति में निरन्तर कार्यक्रम और सामाजिक गतिविधियों का आयोजन करते आ रहे है, और हमें अपने इस संक्षिप्त प्रयासों से संतुष्टि भी है। हमारे इस प्रयास में अब तक इन समारोह के जरिए तिलवाड़ा बावई मोटर मार्ग पर 1 लाख 20 रूपये की लगात से एक भव्य स्मृति द्वार और अगस्त्यमुनि में राज्य स्तरीय बालिका छात्रावास का नामकरण शहीद यशोधर बेंजवाल के नाम पर करवाने का कार्य किया जा चुका है। शहीद की स्मृति में इन नौ सालों में हमारी संस्था एक पत्रिका का भी प्रकाशन करती है, और यह सब जनसहयोग से ही होता आया है। हमारे इस प्रयास को तब और भी अधिक गति मिली जब आपने शहीदों के पैत्रक गांवों को आदर्श गांव के रूप में विकसित करने की महत्वकांक्षी योजना की शुरूवात की। इस आश्य का सूचना पत्र मेरे गांव बेंजी में भी पहुंचा। पलायन से जूझते हुए हमारे गांव के लिए यह उम्मीद की किरण थी। दिनांक 16-01-2015 को खण्ड विकास अधिकारी अगस्त्यमुनि की उपस्थिति में मेरे गांव में खुली बैठक का आयोजन किया गया जिसमें गांववासीयों से प्रस्ताव आमंत्रित किए गए। मेरे ग्राम वासीयों द्वारा शहीद के स्मारक/मूर्ति स्थापना, शहीद स्मृति मेले के आयोजन हेतु वित्तिय अनुदान, राजकीय महाविद्यालय रूद्रप्रयाग का नामकरण शहीद यशोधर बेंजवाल के नाम पर किए जाने एवं गांव में अवस्थापना विकास हेतु एक अस्पताल, पोस्टआफिस, बैंक खोले जाने समेत ग्राम विकास से जुड़े कुल 18 प्रस्ताव दिए गए। लेकिन अब एक साल उपरांत भी किसी विभाग ने प्रस्तावों पर कोई कार्यवाही नहीं दिखाई। उक्त क्रम में प्रधान बेंजी द्वारा जिलाधिकारी रूद्रप्रयाग को शिकायती पत्र लिखकर विकास कार्यो/योजनाओं की समीक्षा करने का आग्रह किया गया। जिसके उपरांत दिनांक 11.02.2015 को मुख्य चिकित्साधिकारी रूद्रप्रयाग द्वारा पत्र के माध्यम से बेंजी में स्वास्थ्य उपकेन्द्र की स्थापना के लिए नवीन प्रारूप पर प्रस्ताव गठित कर कार्यालय में जमा करवाने को कहा गया। पुनः ग्राम सभा की खुली बैठक कर नया प्रस्ताव स्वास्थ्य विभाग को प्रेषित किया गया जिस पर आज तक कोई जवाबी पत्र नहीं आया है।
इस क्रम में शिक्षा विभाग द्वारा हमारे प्रस्ताव को दरकिनार करते हुए हमारे ही गांव के प्राथमिक विद्यालय जो कि न्यून छात्र संख्या के चलते अगले सत्र से बंद होने जा रहा है का नामकरण शहीद के नाम पर किए जाने का अनुमोदन कर दिया गया। महोदय शहीद के प्रति सम्मान की आपकी इतनी महत्वकांक्षी योजना केवल उनके पैत्रक गांवों तक ही सिमटनी है तो फिर राज्य प्राप्ति के लिए उनकी शहादत के मायने क्या है? महोदय शहीदों के नामकरण से जुड़े प्रस्तावों में कम से कम जिलास्तरीय विद्यालयों /संस्थानों को चुना जा चाहिए। महोदय शहीद स्मृति संस्था द्वारा रूद्रप्रयाग महाविद्यालय के नामकरण का प्रस्ताव दिया गया था लेकिन उस प्रस्ताव पर कोई कार्यवाही तो दूर एक जवाबी पत्र भी ग्राम पंचायत/शहीद संस्था को प्राप्त हुआ। जिसके लिए शहीद स्मृति संस्था ने अपनी पूर्ण नारजगी भी व्यक्त की थी। चंूकि ग्राम सभा के प्रस्तावों पर अमल करना या ना करना शासन और प्रशासन की जिम्मेदारी है इसलिए हम सभी ग्रामीण उचित कार्यवाही का इंतजार अवश्य करेंगे।
महादेय, राज्य सरकार के इस सम्मान से गौरवान्वित हम समस्त ग्रामवासीयों ने दिनांक 4 जून को राज्य सरकार से मिले इस सम्मान की आभारोक्ति के लिए शहीद के जन्मदिवस के अवसर पर भव्य ग्रामोत्सव का आयोजन किया था जिसमें क्षेत्र के विधायक डा0 हरक सिंह रावत जी को मुख्यअतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया, लेकिन तमाम अनुरोधों के बावजूद माननीय मंत्री और हमारे विधायक शहीद को सम्मान देने गांव में नहीं पहुंचे। कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष कांग्रेस जनपद रूद्रप्रयाग श्री विनोद भट्ट एवं जिला पंचायत सदस्य योगम्बर सिंह नेगी ने हमारे आभार को ग्रहण किया और भरोसा दिलाया कि आप (मुख्यमंत्री जी) तक हम ग्रामीणों की आभारोक्ति और मांगों को अवश्य पहुंचायेगे।
प्रथम बैठक के आठ माह उपरांत दिनांक 13-08-2015 को इस संबध में दूसरी बैठक आहूत की गई, जिसमें पूर्व के प्रस्तावों को संबधित विभागों तक पहुंचाने की जानकारी दी गई। इस बार भी बिना ग्रामीणों की सहमति के जर्बदस्ती एक सड़क मार्ग का नामकरण शहीद के नाम पर किए जाने की बात कही गई, महोदय शहीद संस्था इस सड़क के प्रवेश द्वार पर पहले ही एक भव्य द्वार बना चुकी है, जिसका नामकरण अब महज औपचारिकता भर ही है। महोदय इन औपचारिकताओं से शहीदों के गांव आदर्श कैसे बन पाएंगे? अच्छा होता यदि सरकार और शासन के प्रतिनिधि ग्रामीणों की मांगों पर कार्यवाही करते और आदर्श गांव में अवस्थापना विकास की योजनाओं का क्रियान्वयन कर उस पर की जा रही कार्य प्रगति की जानकारी ग्रामीणों के सामने रखते। लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है जिससे हम ग्रामीण खुद को छला सा भी महसूस कर रहे है। महोदय इस पत्र के साथ आपको प्रस्तावों की एक प्रति प्रेषित कर रहे है जिस पर आप अपने स्तर से कार्यवाही करवाने की महति कृपा करेंगे।
हम ग्रामीण केवल शहीद का सम्मान चाहते है। मूलभूत सुविधाओं के अभाव में हमारा गांव पहले ही जनशून्य होने के कगार पर है ऐसे में जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा और सरकारी योजनाओं की औपचारिकता हमें और भी दुखद स्थिति मंे लाकर खड़ा कर देती है। बेंजी गांव ने राज्य आंदोलन में हमेशा से बढ़चढ़ कर भाग लिया, अगस्त्यमुनि में राज्य आंदोलन के दौरान बेंजी गांव के ही 95 वर्षीय स्व0 हरिदत बेंजवाल की अनिश्चितकालीन भूखहड़ताल पर बैठकर राज्य आंदोलन के सबसे गुजुर्ग आन्दोलनकारी का तमगा हासिल किया था। मेरे गांव के लगभग हर ग्रामीण ने रोज साढ़े पांच किलोमीटर का पैदल सफर तय कर अगस्त्यमुनि में आंदोलन में अपनी जोरदार उपस्थिति दर्ज की थी, राज्य आंदोलन में बेंजी गांव के ग्रामीणों के ही जनगीत संपूर्ण केदारघाटी में उत्प्रेरक का काम करते रहे, इन सबके बावजूद भी हमारे गांव के किसी भी व्यक्ति ने राज्य आंदोलनकारी आरक्षण का श्रेय लेना उचित नहीं समझा, हम समस्त ग्रामीण अपनी मातृभूमि के लिए हमेशा गर्व का अनुभव करते है और करते रहेंगे। महोदय, हम अपने गांवों को खुशहाल देखना चाहते है और यह अनुरोध भी गांवों के लिए ही है।
महोदय, योजनाओं को साकार होने में समय अवश्य लगता है और हम ग्रामीण भी इसके लिए आप पर पूर्ण विश्वास रखते है, और आशा करते है कि भविष्य में हमारे गांवों में आदर्श ग्राम की संकल्पना साकार होगी। महोदय इस बाबत कुछ अनुरोध भी हम ग्रामीण कर रहे है जिन पर आप अवश्य गौर कीजिएगा। यह अनुरोध हमारे जैसे अन्य सभी शहीद आदर्श गांवों के लिए भी है।
1. चयनित गांवों की स्थिति के अनुरूप सरकार पहली प्राथमिकता के रूप में गांव में स्कूल, अस्पताल, बैंक, पोस्टआफिस और अन्य ग्राम स्तरीय विभागीय कार्यालयों/संस्थानों की स्थापना का अवश्य प्रयास किया जाए, जिससे गांव में आदर्श ग्राम की संकल्पना तैयार हो सके।
2. शहीद आदर्श ग्राम में शहीद की चिरस्थायी स्मृति के लिए स्मारक एवं मूर्ति स्थापना का कार्य भी प्राथमिकता के आधार पर अवश्य किया जाए। संभव हो सके तो राज्य सरकार स्वंय शहीदों की मूर्तियों को तैयार करवाए और उन्हें पैत्रक गांवों में स्थापित करें।
3. सरकार द्वारा भविष्य में खोले जाने वाले नए तकनीकी संस्थान मसलन आईटीआई, पॉलीटेक्निक, जवाहर नवोदय विद्यालय, राजीव गांधी नवोदय विद्यालय, केन्द्रीय विद्यालय, वन विभाग एवं उद्यान विभाग की नर्सरीयाँ, शोध केंन्द्र अथवा जिला स्तरीय विभागीय संस्थानों/कार्यालयों की स्थापना हेतु शहीद आदर्श ग्रामों को वरीयता मिले, जिससे इन गांवों में अवस्थापना विकास को एक अप्रत्यक्ष सहयोग प्राप्त हो सके।
4. आदर्श गांव से संबधित जिले के समस्त विभाग स्वतः एक योजना एक वित्तिय वर्ष में आदर्श गांव के लिए रखें और उस पर कार्य करना सुनिश्चित करें जिसकी समीक्षा का जिम्मा सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय के अधीन किया जाए।
5. शहीद आदर्श गांवो के विकास के लिए नोडल अधिकारी के रूप में जिलाधिकारी अथवा जिलास्तरीय अधिकारी को ही जिम्मेदारी दी जाय।ं
5. राज्य के समस्त विधायक अपने-अपने क्षेत्र के शहीद गांवों को प्राथमिकता के आधार पर गोद लें, अपनी सुविधानुसार इन गांवों का भ्रमण अवश्य करें विशेषकर प्रशासन की उपस्थिति में वहाँ आयोजि त होने वाली खुली बैठकों में अपनी उपस्थिति दर्ज कर ग्रामीणों में नया आत्मविश्वास जगायें।
महोदय शहीदों के प्रति वास्तविक सम्मान आवश्यक है और हम सभी इसके लिए सदैव प्रयासरत रहेंगे, लेकिन अब राज्य सरकार को भी ठोस निर्णय लेना होगा, कोरी घोषणाओं से जनभावनाओं को ठेस पहुंचती है, इसलिए आपको यह अनुरोध पत्र लिख रहा हूँ। आशा है आप हमारी भावनाओं को समझने का प्रयास करेंगे।
– दीपक बेंजवाल

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