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उत्तराखण्ड के शिक्षा जगत में खलबली, बोर्ड परीक्षा में केदारघाटी का धमाल !

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Sachchida Nand Semwal
सीबीएसई हाईस्कूल- इण्टर की बोर्ड परीक्षा के परिणाम सम्बन्धी अभीतक मेरे को श्री Kunjethi Himanshu Rawat से प्राप्त रुझानों के अनुसार प्राकृतिक आपदा की दृष्टि से अति संवेदनशील उत्तराखण्ड के रुद्रप्रयाग जिले ने सभी जिलों को बहुत पीछे छोड़ दिया है।

 

उत्तराखण्ड के शिक्षा जगत में खलबली मचनी स्वाभाविक थी, कारण यह है कि हाईस्कूल में राज्य के 25 शीर्षस्थ उच्चतम प्राप्ताङ्क वाले छात्रों में से 20 रुद्रप्रयाग जिले के ही हैं। इनमें भी सबसे अधिक छात्र विद्यामन्दिर ऊखीमठ, केदार घाटी के हैं। शोच्य विषय ही है कि उसाड़ा गांव की राइका दैड़ा में पढ़ने वाली मात्र एक छात्रा को छोड़कर ये सभी होनहार प्राईवेट विद्यालयों के हैं।

पैतृक जमीन-जायदाद त्यागकर जो लोग अपने बच्चों की मात्र पढ़ाई के लिए दूनप्रस्थ हो गये हैं, उनके लिए यह एक आईना है कि पढ़ाई कहीं भी अच्छी हो सकती है। यह सरकारी विद्यालय के अध्यापकों के लिए भी एक बहुत बड़ी प्रेरणा है।

जहाँ भारी भरकम फीस देने के बाद बच्चे 4 साल में कक्षा 1 उत्तीर्ण होते हैं और 2-3 साल के सबसे छोटे बच्चे का सुबह 4 बजे से 7 बजे और दिन में 1 बजे से 10 बजे रात तक तो घर में भी पूरा कुनबा गुरु बन जाता है,(उसकी बाळी नींद भी छीनते हैं!) ऐसा देहरादून 12 वीं परीक्षा के रिजल्ट में ऊपर से 8 वीं सीढ़ी पर रहा।

 

रुद्रप्रयाग के सामने देहरादून इस मामले में चारों खाने चित्त हो गया है!(रुद्र०94.59% : दे० 80.91%)। अब और भी खैर नहीं है, क्योंकि इस सत्र से सब जगह एक समान एनसीईआरटी की पुस्तकें चलेंगी!!

रुद्रप्रयाग जिले में तो कल से अभीतक खुशी की सुनामी छायी होगी। एक बड़ी जिम्मेदारी जिले की यह हो गयी है कि यह दुष्प्राप्य कीर्तिमान बना रहे और अगर ऐसा होता है तो पूरे उत्तराखण्ड में सभी लोग बच्चों की पढ़ाई के लिए ‘बाहर’ बोलने के बजाय ‘अन्दर’ बोलेंगे।

की वाल से साभार