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उत्तराखंड की राजधानी का हाल,दूनवासी पी रहे दूषित पानी

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देहरादून। सामाजिक वैज्ञानिक संस्था स्पैक्स के सचिव डा$ बृजमोहन शर्मा ने कहा है कि दून में जनता को स्वच्छ जल उपलब्ध कराये जाने की आवश्यकता है, उनका कहना है कि जॉय समिति व ग्रास रूट अवेयरनेश संस्था के सहयोग से साठ वार्डों में जल गुणवत्ता परीक्षण अभियान चलाया गया लेकिन कहीं भी शुद्घ जल उपलब्ध नहीं हो पाया। उनका कहना है कि दिव्य विहार एवं सरस्वती विहार में बेहतर जल पाया गया और साठ वार्डों में 76 नमूने लिये गये।

 
उत्तरांचल प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि संस्था द्वारा चलाये गये के द्वारा विगत 18 वर्षों से आम जनमानस को शुद्घ पेयजल के प्रति जागरुक करने के उददेश्य से जनजागरुकता अभियान संचालित किये जा रहे हैंंं, जबकि शुद्घ पेयजल प्रान्त करना वास्तव में एक आम व्यक्ति का संवैधानिक अधिकार है। उनका कहना है कि इस वर्ष भी स्पैक्स, देहरादून के द्वारा माह जून से माह सितम्बर तक देहरादून में जन-जन को शद्घ जल अभियान जल प्रहरियों के मदद से चलाया जा रहा है।

 

उनका कहना है कि इस अभियान के तहत स्पैक्स व्याख्यान, बच्चों के लिए कार्यशाला तथा देहरादून के 60 वार्डों में जल गुणवत्ता परीक्षण अभियान चलाया गया। इस अभियान में जॉय समिति व ग्रासरूट अवेयरनेश संस्था ने सहयोग किया। उनका कहना है कि जिसमें देहरादून नगर निगम क्षेत्र के सभी साठ वार्डों तथा उसमें सम्मिलित मलिन बस्तियों में पेयजल के नमूने एकत्रित कर परीक्षण प्रारम्भ किया गया। इस अभियान को साकार करने में जल प्रहरियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इस अभियान की प्रथम चरण की रिपोर्ट को आज जनहित में जारी किया गया है। उनका कहना है कि इस अभियान में कुछ जल के नमूने विशिष्ट व अतिविशिष्ट व्यक्तियों के निवास स्थानों से भी लिए गये।

 
इसी क्रम में प्र्रथम चरण में 60 वार्डो से 76 पेयजल के नमूने जल प्रहरियों की मदद से विभिन्न घरों से लिए गए। उनका कहना है कि कई स्थानों से प्रान्त जल नमूनों में अवशेषित क्लोरीन नहीं पाई गई और (सही मानक 0$2 मिली$ग्राम/लीटर) रहा है। बकरालवाला, इन्दिरा कॉलोनी, सालावाला, विजय कॉलोनी, कालीदास रोड़, अंसारी रोड़, चुक्खुवाला, डंगवाल मार्ग, ईद्गाह, प्रकाश नगर, देव कॉलेज रोड़, ब्राहमवाला खाला, नालापानी, डोभालवाला, अहीर मंडी, छबीलबाग, खुडबुड़ा, राजीव कॉलोनी, शिवाजी रोड़, संजय कॉलोनी, बद्रीश कॉलोनी, डांडा, धर्मपुर, राजीव नगर, आजाद कॉलोनी, पटेलनगर, कांवली ग्राम, कारगी चौक, पथरीबाग, टी$एच$डी$सी$ कॉलोनी, झण्डा बाजार, लोहिया नगर, निरंजनपुर, ऋषि विहार, सीमाद्वार, मोहित नगर, चमनपुरी, जी$एम$एस$रोड़, शास्त्री नगर, कौलागढ़, अंकित विहार, नींबू वाला, कैनाल रोड़, विजय पार्क, आकाशदीप कॉलोनी, लाड़पुर, इन्द्रिरा कॉलोनी, कर्जन रोड़, सिरमौर मार्ग, ई$सी$रोड़, क्रास रोड़, पंडितवाड़ी, बिंदाल, गुजराती बस्ती में क्लोरीन नहीं पाई गई।

 

उनका कहना है कि यदि पानी में क्लोरिन आता है तो कम से कम चार घण्टे बाद उक्त पानी को इस्तेमाल करें तथा सुपर क्लोरिननेशन होता है तो 6 से 12 घण्टे तक पानी का उपयोग किसी भी प्रकार से ना करें जैसे नहाना, पीना, कपड़े धोना, खाना बनाना, बर्तन साफ करना आदि। यदि क्लोरिन वाले का पानी का सेवन करेगें तो त्वचा रोग, एसिडीटी बाल झडऩा, बालों का सफेद होना, आँखों की बीमारी, अल्सर आदि रोग होने की संभावना होती है। उनका कहना है कि यदि पानी में फिकल कालिफार्म आता है तो इसके कारण दस्त, उल्टी, पिलिया, हैजा, हैपोटाइटिस बी, पैट में कीड़े, गैस की बीमारी व भूख ना लगना आदि रोग होने की सभावना होती है।

 

इसके लिए पानी को कम से कम 12 मिनट तक मंदी आँच में उबालकर ठण्डा होने के बाद छॉनकर प्रयोग कर सकते हैं। उनका कहना है कि स्पैक्स के विभिन्न अस्पतालों के बाल चिकित्सकों से वार्ता करने पर उन्होंने बताया कि लगभग 75 से 82 प्रतिशत बाल रोगियों में जल जनित रोग पाये जा रहे है। जिन स्थानों से पानी के नमूने लिए गए उन स्थानों के लोगों का जल के सम्बन्ध म बताया है। रीठा मण्डी निवासी ओम प्रकाश सेठी ने बताया कि पानी गन्दा और बदबूदार आता है।