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उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा 10वीं और 12वीं के रिजल्ट घोषित

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रामनगर। उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद ने शनिवार को 10वीं और 12वीं के रिजल्ट घोषित कर दिया। 10वीं में कुल 74.57 प्रतिशत बच्चे और 12वीं में 78.97 प्रतिशत बच्चे उत्तीर्ण हुए हैं। प्रदेश में 1 लाख 30 हजार 94 बच्चों से दसवीं और एक लाख 46 हजार 166 विद्यार्थियों ने बारहवीं की परीक्षा दी थी। परीक्षा उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद के सभापति आरके कुंवर ने रिजल्ट घोषित किए। 10वीं में ऊधमसिंहनगर के राणा प्रताप इंटर कॉलेज की छात्रा काजल प्रजापति टॉपर रहीं। काजल ने 98.40 प्रतिशत अंक हासिल कर उत्तराखण्ड बोर्ड में टॉप किया है। 12 वीं में 78.97 फीसदी हुए विद्यार्थी उत्तीर्ण रहे। आरएलएस चैहान इंटर कॉलेज जसपुर की छात्रा दिव्यांशी राज टॉपर रहीं। दिव्यांशी को 98.40 प्रतिशत नंबर मिले हैं।

विद्यालयी शिक्षामंत्री अरविंद पांडे द्वारा उत्तराखंड बोर्ड का दसवीं व बारहवीं का रिजल्ट जारी किया गया। उत्तराखण्ड बोर्ड की परीक्षा में लड़कियों ने फिर बाजी मारी। 12वीं में 82.83 प्रतिशत छात्राएं उत्तीर्ण हुई, तो 75.03 प्रतिश छात्र उत्तीर्ण हुए। वहीं 10वीं में 80.22 प्रतिशत छात्राएं उत्तीर्ण हुईं। 10वीं में मात्र 68.96 प्रतिशत छात्र ही पास हो पाए। दसवीं की परीक्षा में बागेश्वर का जलवा बरकरार रहा। बागेश्वर जिले के 84.06 प्रतिशत बच्चे पास हुए और हरिद्वार सबसे फिसड्डी रहा, दसवीं में हरिद्वार के 64.96 प्रतिशत बच्चे उत्तीर्ण हुए।

12वीं की बोर्ड परीक्षा में भी बागेश्वर जिले का जलवा रहा, 12वीं में जिले के 91.99 प्रतिशत छात्र उत्तीर्ण रहे। हरिद्वार सबसे फिसड्डी जिला रहा यहां 66.09 प्रतिशत छात्र उत्तीर्ण हुए। विद्यालयी शिक्षा परिषद के सभापति डॉ. आरके कुंवर ने कहा कि बोर्ड का नतीजों में पहाड़ के बच्चों का प्रदर्शन बेहतर रहा है। खासकर बागेश्वर, चमोली और पिथौरागढ़ के विद्यार्थियों का पासिंग प्रतिशत 80 के पार ही रहता है। पहाड़ में शिक्षकों की तैनाती पर हम काम कर रहे हैं। मैदान में शिक्षक होने के बावजूद नतीजें बेहतर क्यों नहीं आ रहे हैं, इस पर भी गौर किया जाएगा।

हाईस्कूल में बागेशवर का रिजल्ट 84.06 के साथ अव्वल रहा। जबकि रूद्रप्रयाग 81.87,पौड़ी 81.13 व पिथौरागढ़ का 80.63 प्रतिशत रिजल्ट रहा। जबकि मैदानी जिलों में हरिद्वार 64.96 और उधमसिंह नगर 64.75 रिजल्ट के साथ फिसड्डी रहे। इंटर में भी बागेश्वर 91.99 लेकर अव्वल रहा। जबकि रुद्रप्रयाग 89.77, पिथौरागढ़ 86.13 व अल्मोड़ा 86.06 प्रतिशत रिजल्ट रहा। जबकि मैदानी जिलो में हरिद्वार 66.09 रिजल्ट के साथ फिसड्डी रहा।

छह घण्टे रोज की पढ़ाई ने बनाया टापर
असालतपुर टांडा, जसपुर निवासी दिव्यांशी के पिता सुरेंद्र कुमार स्योहारा चीनी मिल में लिपिक हैं। जबकि मां सरिता गृहणी हैं। दिव्यांशी ने बताया कि उसने रोजाना छह घंटे बिना तनाव के पढ़ाई की। दिव्यांशी सुबह साढ़े तीन बजे उठ जाती थीं। स्कूल के अलावा वह तीन कोचिंग लेती थी। दिव्यांशी बताती हैं कि घरवालों ने भी उसे काफी सपोर्ट किया। पढ़ाई की खातिर घर में टीवी तक नहीं लगवाया। दिव्यांशी ने भी सोशल मीडिया फेसबुक और व्हाट्सएप से दूरी बनाकर रखी।

बेटियों ने लगातार आठवें साल लहराया परचम
दिव्यांशी अपने गांव से स्कूल और कोचिंग आने जाने के लिए साइकिल का इस्तेमाल करती थीं। दिव्यांशी ने बताया कि वे रोजाना करीब 24 किलोमीटर साइकिल चला स्कूल और कोचिंग क्लास अटेंड करने जाती थीं। दिव्यांशी ने सफलता का मंत्र बताया कि जितना मन हो उतना ही पढ़ो। बताया कि वह करीब छह घंटे पढ़ाई करती थी। गांव में बिजली की समस्या रहती थी तो वह बैट्री से पढ़ाई करती थीं। दिव्यांशी ने अपने माता-पिता और शिक्षकों को सफलता का श्रेय दिया है।

काजल के परिजनों को यकीन नहीं हो रहा
खटीमा की काजल प्रजापति ने राज्य टॉप किया है। खटीमा के राणा प्रताप इंटर कॉलेज की हाइस्कूल की छात्रा काजल प्रजापति ने 98.40 प्रतिशक अंक लाकर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। खटीमा के मेलाघाट रोड पर रहने वाली काजल प्रजापति के पिता राजकुमार प्रजापति की खटीमा वर्कशॉप है। वहीं माता गृहणी है। परिवार वालों को जैसे ही बेटी का प्रदेश टॉपर करने के बारे में पता चला तो उनकी आंखे छलक उठीं।

वहीं काजल को भी अपने टॉप होने के बारे में लोगों से पता चला। काजल को जैसे ही टॉप करने के बारे में पता चला तो उसकी आंखे छलक उठीं और अपने माता पिता से लिपट कर रोने लगी। काजल ने बताया कि वह अभी आगे और मन लगाकर पढ़ाई करना चाहती है। उसके बाद ही वह अपने करियर के बारे में सोचेगी। काजल के पिता ने बताया कि उन्होंने अपनी हैसियत के अनुसार अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए हर सुख सुविधा उपलब्ध कराई।

वहीं काजल की माता प्रीति प्रजापति रोते हुए बताती हैं कि काजल बोर्ड परीक्षा के दौरान पढ़ाई में इतना मग्न हो जाती थी कि उसे भोजन करना ही याद नहीं रहता था। काजल ने हिन्दुस्तान अखबार से बात करते हुए बताया कि कई बार पढ़ाई करने के दौरान उसे खुद याद नहीं रहता था कि उसने खाना खाया है कि नहीं। काजल भावनात्मक रूप से बताती है कि उसकी मां उसे यह बोल कर भोजन कराती थी कि तुमने भोजन नहीं किया है।

काजल बताती है कि उसने 12 से 15 घंटे पढ़ाई की है। काजल ने बताया कि उसने नोट्स बनाकर और योजनाबद्ध तरीके से पढ़ाई की है। यही कारण है कि वह मेरिट लिस्ट में पहले स्थान पर सकी है। हालांकि काजल ने बताया कि उसे यह उम्मीद थी कि वह अच्छे नंबर लाकर पास होगी लेकिन यह नहीं सोचा था कि वह प्रदेश की मेरिट लिस्ट में टॉप करेगी।

काजल के भाई बहन भी हैं टॉपर
काजल के घर में शुरुआत से ही पढ़ाई का माहौल रहा है। काजल की बहन शीतल प्रजापति साल 2013 में दसवीं की बोर्ड परीक्षा में प्रदेश में 24वां स्थान प्राप्त किया था। वहीं भाई कौशल प्रजापति ने साल 2015 में 12वीं की परीक्षा में प्रदेश में 21वां स्थान प्राप्त किया था।

एक बार फिर बेटियों ने बाजी मारी
उत्तराखंड बोर्ड में एक बार फिर बेटियों ने बाजी मारी है। हाईस्कूल और इंटर में बेटियों ने लगातार आठवीं बार लडक़ों को पछाड़ते हुए कामयाबी का शिखर छुआ है। बीते वर्षों से लगातार छात्राओं का सफलता प्रतिशत लडक़ों से काफी बेहतर रहा है।
इस साल हाईस्कूल परीक्षा में छात्रों की कामयाबी का प्रतिशत 68.96 प्रतिशत रहा। जबकि छात्राओं का उत्तीर्ण प्रतिशत 80.22 फीसदी रहा है। पिछले साल हाईस्कूल में छात्रों का उत्तीर्ण प्रतिशत 68.76त्न और छात्राएं 78.51त्न रहा था।

 

देखा जाए तो पिछले के मुकाबले छात्राओं पास प्रतिशत दो फीसदी बढ़ा है। जबकि छात्रों का उत्तीर्ण प्रतिशत पिछले बार से घटा है। वहीं इंटरमीडिएट की बात करें तो छात्राओं का पास प्रतिशत 82.03 और छात्रों का 75.08 फीसदी रहा। छात्रों का पिछले साल पास प्रतिशत 75.56 रहा था, जो इसबार थोड़ा बढ़ा है। छात्राओं का पास प्रतिशत पिछले साल 82.07त्न रहा था। इसमें इस बार मामूली कमी जरूर है, लेकिन ऑवरऑल ये छात्रों से ज्यादा है।