बड़ी मछलियों को बचाने के लिए सुशील को सलाखों के पीछे डाला

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टैक्सी बिल घोटाले में निशंक के करीबियों के नाम उजागर
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देहरादून। उत्तराखण्ड स्वास्थ्य विभाग में हुए टैक्सी बिल घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में हरिद्वार से सांसद डॉ रमेश पोखरियाल निशंक के करीबियों के नाम उजागर होने से पूरे मामले में नया मोड़ आ गया है। विभागीय जांच होने के बाद उनियाल टूर एण्ड ट्रैवल एजेंसी के मालिक सुशील उनियाल को दस माह तक सलाखों के पीछे इस लिए डाला गया था कि उन्होंने सरकार को पैट्रोल, डीजल के फर्जी बिल देकर अपना भुगतान करवाया था। लेकिन जेल से दस माह की सजा काटकर रिहा हुए सुशील उनियाल ने इस पूरे मामले में खुद को बेकसूर बताते हुए घोटाले में निशंक के करीबियों को जिम्मेवार ठहराया और उनके नाम उजागर किये ।
शुक्रवार को प्रिंस चौक स्थित एक निजी होटल में उनियाल टूर एण्ड ट्रैवल के मालिक सुशील उनियाल ने पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि साल 2009 से 2013 में भाजपा सरकार के रहते हुए ट्रैवल से ट्रैक्सी गाडि़यां को किराये पर लिया जा था। लेकिन विभागीय जांच बैठाने के बाद दोषियों को बचाने के एवेज में मुझे सलाखों के पीछे भेजा गया। जबकि हाई कोर्ट ने विभाग को उन लोगों के खिलाफ जांच के आदेश दिये हैं जो इस घोटाले के मास्टर माइण्ड थे।
गौरतलब है कि टैक्सी बिल घोटाले की जांच करने वाले संयुक्त सचिव आरआर सिंह की रिपोर्ट में स्वास्थ्य विभाग के 12 सीएमओ, सीएमएस स्तर के अधिकारियों को दोषी मानने के साथ ही दो पूर्व मुख्यमंत्रियों के पांच निजी सचिवों को भी दोषी माना है। रिपोर्ट में स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के साथ ही सीएम कार्यालय के पूर्व अधिकारियों को भी दोषी पाया है।

इन लोगों के नाम हुए उजागर
बिलों के भुगतान की लीपा पोती में उनियाल टूर एंड ट्रैबल एजेन्सी के मालिक सुशील उनियाल और टैक्सीयों के मालिक संजय कुमार ने मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक के ओएसडी एस के द्विवेदी के समेत मनवीर चौहान, देव आर्य, एसएन ममगंाई,के नामों को उजागर किया गया है। सुशील उनियाल ने कहा कि इन लोगों की वजह से टैक्सी बिलों में खेल खेला गया था। लेकिन जब स्वास्थ्य विभाग द्वारा जांच बैठाई गई तो बड़ी मछलियों को बचाने के एवज में मेरी ट्रैवल एजेंसी पर मुकदमा दर्ज कर मुझे आरोपी बनाकर सलाखों के पीछे डाला गया ।
चुनाव प्रचार में भी हुआ गाडि़यों का इस्तेमाल
सुशील उनियाल और संजय कुमार के मुताबिक सरकार में मुख्यमंत्री रहते हुए उनके चेहतों ने राज्य में हो रही रैलीयों से लेकर चुनाव प्रचार प्रसार में कार्यकर्ताओं को ढोने के साथ साथ निजी काम व उनके चेहतों की शादी विवाहों के लिए टैक्सी गाडि़यों को उपयोग में लाया गया जाता था। वही शहर से बाहर व महिनों तक पहाड़ों में भी पिकनिक के लिए भी भरमण किया जाता था। टैक्सी गाडि़यों का एक दिन का किराया 5 हजार रुपये के हिसाब से तय किया गया था। लेकिन जब बिलों को मुख्यमंत्री आवास भेजे जाते थे। तब उन बिलों को मुख्यमंत्री आवास से स्वास्थ्य विभाग को भेजा जाता था। लेकिन जब भाजपा सरकार के सत्ता से हट जाने के बाद नई सरकार आई तो विभाग द्वारा जांच बैठाई गई और फर्जी बिल के आरोप में मुझे आरोपी बनाकर जेल भेजा गया ।
विभाग कर रहा दोषियों की पैरवी
उत्तराखण्ड स्वास्थ्य विभाग पर आरोप लगाते हुए सुशील उनियाल ने कहा कि बिल घोटाले में विभाग असली दोषियों की पैरवी कर रहा है। जबकि विभाग ने सभी दोषियों को बख्सते हुए मेरे खिलाफ कार्रवाई की है। इस मामले में कार्ट ने असली दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश भी विभाग को दे दिये है। लेकिन विभाग द्वारा अभी तक दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के उचित कदम नही उठाये गये। सुशील ने कहा कि उच्च न्यायालय ने दायर याचिका रिट याचिका का निस्तातरण करते हुए मुख्य सचिव को आदेशित किया था कि इस प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच एजेन्सी से करा कर प्रकरण से जुड़े सभी आरोपियों के विरूद्व कानूनी कारवाई की जाए।

नियम विरूद्व डेढ़ करोड़ के भुगतान का मामला
टैक्सी बिलों के गलत भुगतान का मामला स्वास्थ्य विभाग में 2009 से लेकर 2013 तक सामने आया था। टैक्सी बिलों के भुगतान में देहरादून, टिहरी, ऊधमसिंहनगर और हरिद्वार के सीएमओ तथा इन्हीं जिलों के कई अस्पतालों के चिकित्सा अधीक्षकों ने मुख्यमंत्री कार्यालय से आए पत्रों के आधार पर ट्रैवल एजेंसियों को डेढ़ करोड़ से अधिक का नियम विरुद्ध भुगतान करने की बात सामने आई। जिन सीएमओ और सीएमएस के नाम सामने आए उनमें जीसी बौंठियाल, मीनू रावत, आरके पंत, गुरुपाल सिंह, आरएस असवाल, राजीव हटवाल, वाईएस राणा, एसपी अग्रवाल, सुरेंद्र सकलानी, राकेश कुमार सिन्हा, वीके गैरोला, दीप शर्मा शामिल हैं। घोटाले में 12 सीएमओ, सीएमएस के साथ ही दो पूर्व सीएम के पांच निजी सचिव भी दोषी पाए गए हैं।