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विज्ञान भी हैरान: मां के मंदिर में फर्श पर सोने से मिलती है संतान !

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उदय दिनमान डेस्कः विज्ञान भी हैरान: मां के मंदिर में फर्श पर सोने से मिलती है संतान ! मानो तो भगवान है और न मानो तो पत्थर। हमारे देश में पग-पग पर मंदिरों की भरमान है और हर मंदिर की अलग कहानी होने के साथ मान्यता और हर मंदिर रहस्यों से भरा हुआ है। इसको लेकर दुनिया भर के वैज्ञानिक भी चिंतित है कि आखिर क्या रहस्य है कि मंदिरों के आसपास और मंदिर में वो अलोकिक शक्ति है जो दिखती नहीं है। दुनिया भर के वैज्ञानिक समय-समय पर इसकी खोजवीन कर चुके हैं लेकिन उनके हाथ अभी तक कुछ नहीं लगा। देश के अलग-अलग मंदिरों का रहस्य और आज भी बरकरार है।

आपको बता दें कि हिमालय के कण-कण में भगवान का वास माना गया है और यहां के कण-कण में शिव का अंश माना जाता है। यही कारण है कि देश-विदेश के हजारों श्रद्धालु यहां प्रतिवर्ष अपनी मन्नते लेकर आते हैं। हिमालय के हिमाचल में भी एक अनोख और रहस्यों से भरा होने के साथ-साथ एक अलोकि मंदिर है जिस मंदिर के फर्स पर सोने से महिलाओं को पुत्र रत्न की प्राप्ति हो जाती है ऐसी मान्यता है।

आपको बता दें कि देवभूमि में मां का ऐसा मंदिर है जो विज्ञान के लिए भी रहस्य बना हुआ है। यहां फर्श पर सोने से संतान सुख की प्राप्ति होती है। संतान सुख की प्राप्ति के लिए आज भी हिमाचल के जिला मंडी के लड़भड़ोल स्थित सिमस गांव में स्थित शारदा सिमसा मां के मंदिर में नवरात्रों के दौरान देशभर से हजारों महिलाएं पहुंचती हैं।सदियों से मां महिला श्रद्धालुओं की कामना को पूरा कर रही है। मान्यता है कि मां शारदा मंदिर से महिलाओं को खाली हाथ नहीं लौटाती।

हालांकि जिन महिलाओं के नसीब में संतान सुख नहीं होता, उन्हें भी मां घरेलू कार्यों का आदेश देकर संकेत देती हैं कि उनके नसीब में यह सुख नहीं है।वीरवार को आठवें नवरात्रे के दिन संतानदात्री मां शारदा मंदिर में सैकड़ों दंपति संतान प्राप्ति की कामना लेकर पहुंचे।मां शारदा सिमसा को संतानदात्री के रूप में जाना जाता है। संतान प्राप्ति के लिए महिलाएं मंदिर में सोती है। जिसे धरना कहा जाता है।

धरने में मां किसी भी रूप में स्वप्न में आकर महिला श्रद्धालुओं को फल के रूप संतान का आशीर्वाद देती हैं।महिलाओं को धरने से पहले मंदिर के साथ लगती बावड़ी के पानी से स्नान करना पड़ता है।स्नान के बाद महिलाएं मंदिर में धरने पर (सोने) जाती है।अगर किसी महिला के जीवन में संतान सुख नहीं होता तो मां उनको घर में जाकर काम करने का संकेत देती है।हालांकि इन श्रद्धालुओं को भी मां स्पष्ट रूप से मना नहीं करती है।

यदि मां के आदेश के बाद भी कोई महिला फिर मंदिर में स्नान कर धरने पर जाती है तो महिला को चींटियां काटना शुरू कर देती हैं।हमेशा की तरह इस बार भी राजस्थान, मुंबई, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, यूपी, उत्तराखंड सहित अन्य राज्यों से महिलाएं मंदिर में पहुंची हैं।मंदिर के पुजारी जगदीश शर्मा ने कहा कि कामना पूरी होने पर श्रद्धालु मंदिर में ढोल नगाड़ों के साथ दर्शन के लिए पहुंचते हैं। देश भर से हर साल मां के दर पर श्रद्धालु आते हैं।