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विकास तो जरूरी है, लेकिन विकास का संतुलित होना भी जरूरी

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देहरादून: मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मंगलवार को पं0दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर सर्वे चौक स्थित, आई.आर.डी.टी. सभागार में पं.दीनदयाल उपाध्याय सेवा प्रतिष्ठान द्वारा आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।
मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि पं.दीनदयाल उपाध्याय जी ने एकात्म मानववाद के दर्शन पर विशेष बल दिया।
उनकी स्पष्ट सोच थी कि समाज के सर्वांगीण विकास के लिए अन्तिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचे। पं.दीनदयाल जी ने जिस तरह के समाज की परिकल्पना उन्होंने की थी, हम उसका अनुसरण कर आगे बढ़ रहे हैं। सामाजिक व राजनैतिक जीवन में सुचिता अपनाने व ’सबका साथ-सबका विकास’ की सोच को लेकर आगे बढ़ने का संदेश उन्होंने दिया।
सांसद व पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि पं. दीनदयाल उपाध्याय ने एकात्म मानव दर्शन की अवधारणा पर कार्य किया। एकात्म मानव दर्शन का सम्बन्ध व्यष्टि, समष्टि, सृष्टि व परमष्टि से है। मानव का सम्बन्ध समाज से प्राकृतिक रूप से है। मानव किसी न किसी रूप में एक दूसरे से जुड़ा हुआ है और एक दूसरे पर आश्रित है।
सम्पूर्ण समाज के विकास के बिना एक सुनियोजित विकास की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि पं. दीनदयाल जी मानना था कि विकास तो जरूरी है, लेकिन विकास का पर्यावरण से संतुलन भी जरूरी है। तकनीक का विकास तो जरूरी है लेकिन यह भी ध्यान रखना होगा कि तकनीक का विकास भी उतनी गति से होना चाहिए, जिससे पर्यावरण संतुलित रहे।
विकास तो जरूरी है, लेकिन विकास का संतुलित होना भी जरूरी है। वित्त मंत्री श्री प्रकाश पंत ने कहा कि पं. दीनदयाल उपाध्याय जी के एकात्म मानव दर्शन के चिन्तन को और आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर विधायक श्री हरबंस कपूर, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्री अजय भट्ट, डॉ. आर. के जैन, श्रीमती शुभा वर्मा, श्री कैलाश पंत आदि उपस्थित थे।