विश्व का अकेला अनोखा गांव जहां पैदा हुए 800 लोग एक साथ एक दिन !

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उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के गेनीड़ी खाता गांव के  800 निवासियों के आधार कार्ड पर एक ही दिन जन्म लेने की तिथि

उदय दिनमान डेस्कः विश्व का अकेला अनोखा गांव जहां पैदा हुए 800 लोग एक साथ एक दिन !कभी ऐसा हो सकता है अगर ऐसा है तो यह किसी चमत्कार से कम नहीं और अगर नहीं तो यह क्या एक मानवीय भूल है। आपको बता दें कि हरिद्वार जनपद में एक गांव में आठ सौ लोगों के आधार कार्ड एक ही दिन में जारी हुए और उनकी जन्मतिथि भी एक ही दिन है। यह मानवीय भूल है या फिर कुछ और अभी पता नहीं चल पाया है।

 

जैसा कि आपको पता है कि भारत में आधार की अनिवार्यता को लेकर जो बहस अलग-अलग मंचों और राजनैतिक दलों के बीच छिडी वहस और सुप्रिम कोर्ट तक को इसमें हस्तक्षेप करना पडा है। ऐसे देश में अगर ऐसी खबर आये तो यह अपने आप में चौकाने वाली होने के साथ-साथ एक अनोखी घटना से कम नहीं होगी। कि एक साथ आठ सौ लोगों का जन्म वह भी एक ही गांव में। अफसरों की लापरवाही या कर्मियों की लापरवाही या फिर जनबूझकर यह सब किया गया। खबर अपने आप में चौकाने वाली होने के साथ एक षडयंत्र की ओर भी इशारा करती है।

आपको पता है कि एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी देश में आधार कार्ड को अनिवार्य कर रहे हैं दूसरी तरफ आधार को लेकर कई अनियमितताएं सामने आ रही हैं। इसका ताजा उदाहरण उत्तराखंड के हरिद्वार में सामने आया है।हरिद्वार के एक गांव में आधार कार्ड के पंजीकरण में एक बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। यहां पूरे गांव के सभी निवासियों की जन्मतिथि आधार कार्ड पर 1 जनवरी कर दी गई है। यह एक और त्रुटि है जो विशिष्ट पहचान प्रणाली के प्रभाव के बारे में चिंताएं बढ़ाती है। जबकि दूसरी ओर बैंक खातों से लेकर मोबाइल नंबर तक हर जगह आधार अनिवार्य होता जा रहा है।

 

एक रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तराखंड के हरिद्वार से 20 किलोमीटर दूर गेनीड़ी खाता गांव के सभी करीब 800 निवासियों की उनके आधार कार्ड पर एक ही जन्म तिथि प्रिंट की गई है। निवासियों ने दावा किया कि वोटर कार्ड और राशन कार्ड देने के बावजूद आधार कार्ड में ये गलती की गई है। इन रिपोर्ट्स के आधार पर इसकी गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।उत्तराखंड राज्य में इस घटना के बाद अफसरशाही में हलचल होने के साथ ही इस पर बहस और जांच इत्यादि का सिलसिला शुरू हो गया है।

 

आपको एक अहम बात बता दें कि उत्तराखंड राज्य एक ऐसा राज्य है जहां यहां के मूल निवासियों को अपने पहचान पत्र बनाने के लिए नाको चने चबाने पडते है और यहां अन्य दूसरे प्रदेश से आये लोगों के पहचान पत्र से लेकर राशनकार्ड और अन्य सरकारी सेवाओं का लाभ बाहरी प्रदेशों से आये लोगों को आसानी से मिल जाता है।

 

यहां सचिवालय में बैठे अफसर हो या फिर जिलास्तर पर बैठे अधिकारी सभी अपनी मनमर्जी चलाते है। इसके लिए उदाहरण कई अभी तक सामने आये है। यही नहीं राजनैतिक रोटिया सेकने वाले राजनैतिक दल चाहे वह सत्ता में हो या न हो सभी अपनी राजैतिक रोटिया सेकते रहते है और ऐसे मामले समय-समय पर सामने आते रहते है।

 

आपको यहां एक अन्य बात भी बता दें कि प्रदेश में पुलिस महकमा भी किसी से कम नहीं है। पुलिस महकमा प्रदेश के कई स्थानों पर समय-समय पर सत्यापन अभियान चलाता रहता है। हर बार बाहरी व्यक्ति का सत्यापन आसानी से हो जाता है और उत्तराखंड मूल के लोगों को सत्यापन के नाम पर उत्पीडित किया जाना आम बात है। पुलिस की मिलीभगत से यहां आतंकी और बन्य प्रदेशों के अपराधी आसानी से छुपे रहते है।

 

जबकि गौर करने वाली बात है कि पहाडी प्रदेश होने के साथ यहां निश्चित जातिया ही निवास करती है वह भ सदियों से। इसके बाद भी पुलिस का सत्यापन यहां के मूल निवासियों के लिए ज्यादा होता है। जबकि सभी पुलिस कर्मियों जो सत्यापन के लिए जाते है लगभग सभी पहाडी मूल के होने के साथ-साथ सभी जातियों और सभी जनपदों से भली भाति परिचति होने के बाद भी अफसरों के कारण मजबूरन उत्तराखंड मूल के लोगों के सत्यापन के लिए दवाब अनाते है।

 

अब ऐसी खबर जब सामने आएगी कि 800 लोगों के आधार कार्ड एक ही दिन पैदा हाने के सााथ बने तो इसमें घपले की बू तो आएगी ही। अब आप ही सोचिएगा कि उत्तराखंड राज्य की लडाई क्या हमने इसलिए लडी थी कि हमें यह सब सहना पडे या फिर यहां राज कर रहे अफसरों की मनमर्जी के आगे झूकने के लिए या फिर हम पहाडी है और हमें आसानी से बेवकूफ बनाया जा सकता है। कई ऐसे प्रश्न ळै जो आज हर किसी के मन में कौध रहे है। अब आप खुद ही फैसला किजिएंगा कि क्या…!