udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news यातायात सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर जीप संचालकों की अवैध वसूली !

यातायात सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर जीप संचालकों की अवैध वसूली !

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अनिल भटट
रूद्रप्रयागः विगत दिनो धुमाकोट बस दुर्घटना के उपरान्त शासन, पुलिस /प्रशासन यातायात सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जरूर हरकत मे आया, और यातायात सुरक्षा व्यस्था का सख्ती से पालन कराने के लिऐ धडाधड चालान काटने पर तुली है। अगर सही मायने मे यातायात सुरक्षा व्यवस्था का पहले से ही सख्ती से पालन किया जाता तो निर्दोष 48 लोगों की जाने नही जाती। लेकिन ये हमारी व्यवस्थाओं का ही परिणाम है कि जब तक कोई अनहोनी घटित नहीं हो जाती तब तक हमारा पुलिस/प्रशासन गहरी कुंभकर्णी नींद से नही जाग पाता है।

इस घटना के पीछे भले ही सड़कों का खस्ताहाल होना बताया जा रहा हो लेकिन इस घटना के पीछे पुलिस व आर टी ओ विभाग की भूमिका को भी नजरअंदाज नही किया जा सकता। आखिर सुरक्षित यातायात व्यवस्था का जिम्मा संभाले ये विभाग क्यों मूकदर्शक बने रहते है। बस हादसे के बाद तो ये लग रहा है कि अब विभाग फूल एक्शन मे आ गये हो। शायद इन जिम्मेदार विभागों को ऐसी ही दुर्घटनाओ का इंतजार था।

इस दर्दनाक बस हादसे के बाद पुलिस/प्रशासन सुरक्षित यातायात व्यवस्था को बहाल करने के लिये ओवरलोडिंग पर अकुंश लगाने के लिए धडाधड चालान काट रही है। लेकिन जनाब!! ये कहाँ का नियम है कि वाहन मै क्षमता से अधिक सवारियां न बैठाने पर जीप/टैक्सी संचालकों द्वारा सवारियो से अवैध वसूली की जाय।


अगर हम बात करें रुद्रप्रयाग से अगस्त्यमुनि की दूरी मात्र 17 किमी है। जबकी अगस्त्यमुनि से रुद्रप्रयाग जाने मे यह दूरी बढ जाती है क्योंकि यहाँ बाईपास से होकर जाना होता है। पहले अगस्त्यमुनि से रुद्रप्रयाग जाने पर जनता को जीप/टैक्सी मे 40 रूपये खर्च करने होते थे। तो वहीं रुद्रप्रयाग से अगस्त्यमुनि के लिए सवारियो को जीप/टैक्सी मे 30 रूपये खर्च करने होते हैं ।

लेकिन आजकल कूछ जीप/टैक्सी संचालकों द्वारा सवारियों को यह कह कर उनकी जेवें काटी जा रही है कि आजकल जबरदस्त चैकिंग चल रही है इस वजह से वे क्षमता से अधिक सवारियां नही बैठा पा रहे है और 50 रूपये ले रहे है।जबकी बस मे रुद्रप्रयाग से अगस्त्यमुनि आवो या अगस्त्यमुनि से रुद्रप्रयाग जावो किराया 25 रूपये ही है।

आखिर जनता के साथ ये कैसा न्याय है कि सुरक्षित यातायात व्यवस्था के नाम जीप/टैक्सी संचालक मनमानी पर उतर आये है। क्या लाचार वेवश जनता इसी प्रकार लूट खसोट का सिकार होती रहेगी?? क्यों नहीं पुलिस/प्रशासन का ध्यान इस और जाता है?? क्या इस व्यवस्था पर लगाम लगाने वाला कोई नहीं है?

की वाल से साभार