udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news यहां दीपावली को मां लक्ष्मी की नहीं होती है मां काली की पूजा !

यहां दीपावली को मां लक्ष्मी की नहीं होती है मां काली की पूजा !

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उदय दिनमान डेस्कः यहां दीपावली को मां लक्ष्मी की नहीं होती है मां काली की पूजा !दीपावली पर पूरे देश में मां लक्ष्मी की पूजा होती है और मान्यता भी यहीं है लेकिन हमारे देश में ही एक ऐसी जगह है जहां मां लक्षमी की नहीं बल्कि मां काली की पूजा होती है। यह है पश्चिम बंगाल और बंगाली समुदाय इस दिन मां काली की पूजा करता है. दीपावली के दिन यानी अमावस्या की अर्धरात्रि में की जाती है.

 

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि दीवाली या दीपावली अर्थात “रोशनी का त्योहार” शरद ऋतु में हर वर्ष मनाया जाने वाला एक प्राचीन हिंदू त्योहार है। दीवाली भारत के सबसे बड़े और प्रतिभाशाली त्योहारों में से एक है। यह त्योहार आध्यात्मिक रूप से अंधकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाता है।

 

भारतवर्ष में मनाए जाने वाले सभी त्यौहारों में दीपावली का सामाजिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से अत्यधिक महत्त्व है। इसे दीपोत्सव भी कहते हैं। ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ अर्थात् ‘अंधेरे से ज्योति अर्थात प्रकाश की ओर जाइए’ यह उपनिषदों की आज्ञा है। इसे सिख, बौद्ध तथा जैन धर्म के लोग भी मनाते हैं। जैन धर्म के लोग इसे महावीर के मोक्ष दिवस के रूप में मनाते हैं तथा सिख समुदाय इसे बंदी छोड़ दिवस (en:Bandi Chhor Divas) के रूप में मनाता है।

 

 

माना जाता है कि दीपावली के दिन अयोध्या के राजा श्री रामचंद्र अपने चौदह वर्ष के वनवास के पश्चात लौटे थे।[9] अयोध्यावासियों का ह्रदय अपने परम प्रिय राजा के आगमन से उल्लसित था। श्री राम के स्वागत में अयोध्यावासियों ने घी के दीए जलाए। कार्तिक मास की सघन काली अमावस्या की वह रात्रि दीयों की रोशनी से जगमगा उठी। तब से आज तक भारतीय प्रति वर्ष यह प्रकाश-पर्व हर्ष व उल्लास से मनाते हैं। यह पर्व अधिकतर ग्रिगेरियन कैलन्डर के अनुसार अक्टूबर या नवंबर महीने में पड़ता है।

 

 

दीपावली दीपों का त्योहार है। भारतीयों का विश्वास है कि सत्य की सदा जीत होती है झूठ का नाश होता है। दीवाली यही चरितार्थ करती है- असतो माऽ सद्गमय, तमसो माऽ ज्योतिर्गमय। दीपावली स्वच्छता व प्रकाश का पर्व है। कई सप्ताह पूर्व ही दीपावली की तैयारियाँ आरंभ हो जाती हैं। लोग अपने घरों, दुकानों आदि की सफाई का कार्य आरंभ कर देते हैं। घरों में मरम्मत, रंग-रोगन, सफ़ेदी आदि का कार्य होने लगता है। लोग दुकानों को भी साफ़ सुथरा कर सजाते हैं। बाज़ारों में गलियों को भी सुनहरी झंडियों से सजाया जाता है। दीपावली से पहले ही घर-मोहल्ले, बाज़ार सब साफ-सुथरे व सजे-धजे नज़र आते हैं।

 

वही इसके विपरीत बंगाल में एक अमावस्या में मां दुर्गा का आगमन होता है. जिसे हम शारदीय नवरात्र के तौर पर जानते हैं. 15 दिन बाद दूसरी अमावस्या में मां काली की पूजा करने की प्रथा बंगाल में रही है.दशमी के 6 दिन बाद बंगाल में लक्ष्मी की पूजा होती है. हालांकि, जैसे उत्तर भारत और देश के बाकी हिस्सों में लक्ष्मी के साथ गणेश की पूजा होती है वैसे लक्ष्मी की पूजा नहीं होती है. बंगाल में लक्ष्मी पूजा के दिन सिर्फ मां लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित की जाती है.

 

 

पूजा में माता को विशेष रूप से 108 गुड़हल के फूल, 108 बेलपत्र एवं माला, 108 मिट्टी के दीपक और 108 दुर्वा चढ़ाने की परंपरा है. साथ ही मौसमी फल, मिठाई, खिचड़ी, खीर, तली हुई सब्जी तथा अन्य व्यंजनों का भी भोग माता को चढ़ाया जाता है. तड़के 4 बजे तक चलने वाली इस पूजा की विधि में होम-हवन व पुष्पांजलि का समावेश होता है. इस मौके पर अधिकांश महिला व पुरुष सुबह से उपवास रखकर रात्रि में माता को पुष्पांजलि अर्पित करते हैं.

 

शक्ति सम्प्रदाय की प्रमुख देवी हैं मां काली, यह कुल दस महाविद्याओं के स्वरूपों में स्थान पर हैं. शक्ति का महानतम स्वरुप महाविद्याओं का होता है. काली की पूजा-उपासना से भय खत्म होता है. इनकी अर्चना से रोग मुक्त होते हैं. राहु और केतु की शांति के लिए मां काली की उपासना अचूक है. मां अपने भक्तों की रक्षा करके उनके शत्रुओं का नाश करती हैं. इनकी पूजा से तंत्र-मंत्र का असर खत्म हो जाता है.

 

 

दो तरीके से मां काली की पूजा की जाती है, एक सामान्य और दूसरी तंत्र पूजा. सामान्य पूजा कोई भी कर सकता है, पर तंत्र पूजा बिना गुरू के संरक्षण और निर्देशों के नहीं की जा सकती. काली की उपासना सही समय मध्य रात्रि का होता है. इनकी पूजा में लाल और काली वस्तुओं का विशेष महत्व है. मां काली के मंत्र जाप से ज्यादा इनका ध्यान करना उपयुक्त होता है.

 

मां काली की उपासना शत्रु और विरोधी को शांत करने के लिए करनी चाहिए किसी के मृत्यु के लिए नहीं. आप विरोधी या किसी शत्रु से परेशान हैं तो उस समस्या से बचने के यह उपाय हैं. आपके शत्रु अगर आपको परेशान करते हों तो आप लाल कपड़े पहनकर लाल आसन पर बैठें मां काली के समक्ष दीपक और गुग्गल की धूप जलाएं.

 

मां को प्रसाद में पेड़े और लौंग चढ़ाएं. इसके बाद ‘ऊँ क्रीं कालिकायै नमः’ का 11 माला जाप करके, शत्रु और मुकदमे से मुक्ति की प्रार्थना करें. मंत्र जाप के बाद 15 मिनट तक पानी नहीं छुएं. यह अर्चना लगातार 27 रातों तक करें. ऐसी मान्यता है कि इन उपायों को करके आप मां काली का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं.